कुंदन कुमार/पटना। प्रयागराज से कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमण सिंह ने शनिवार को सदाकत आश्रम में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट पर गंभीर सवाल उठाए। इस दौरान बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम भी उपस्थित रहे।
आस्था के नाम पर विश्वासघात का आरोप
सांसद उज्ज्वल रमण सिंह ने भाजपा पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस सनातन धर्म का सम्मान करती है, लेकिन धर्मनिरपेक्षता पर कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि देश भर के करोड़ों भक्तों ने श्रद्धापूर्वक जो दान दिया था, ट्रस्ट ने उस आस्था के साथ विश्वासघात किया है। सिंह ने आरोप लगाया कि राम मंदिर के नाम पर भाजपा केवल राजनीतिक लाभ लेने का काम कर रही है।
जमीन खरीद घोटाले का पर्दाफाश
प्रेस वार्ता के दौरान सांसद ने अयोध्या में जमीन खरीद में बड़े घोटाले का दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट से जुड़े लोगों ने पहले सस्ते दामों में जमीन खरीदी और फिर उसे भारी मुनाफे के साथ ट्रस्ट को बेचा। सिंह ने कहा, मात्र एक घंटे के भीतर 18 करोड़ रुपये की जमीन की खरीद-फरोख्त दिखा दी गई, जिसमें बड़े पैमाने पर सरकारी और चंदे की राशि की बंदरबांट हुई है।
प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल
सांसद ने चंपत राय और अनिल मिश्रा जैसे पदाधिकारियों के इस्तीफे की ओर इशारा करते हुए पूछा कि यदि सबकुछ पारदर्शी था, तो उन्हें पद से क्यों हटाया गया? उन्होंने कहा कि चूंकि ट्रस्ट का गठन प्रधानमंत्री की सीधी निगरानी में हुआ था, इसलिए उन्हें इस पूरे मामले पर अपनी चुप्पी तोड़कर जवाब देना चाहिए।
113 करोड़ के खर्च और जवाबदेही की मांग
उज्ज्वल रमण सिंह ने प्राण प्रतिष्ठा समारोह में हुए 113 करोड़ रुपये के खर्च और मंदिर में चढ़ावे की धनराशि के प्रबंधन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच होनी चाहिए। सांसद ने जोर देकर कहा कि भक्तों की गाढ़ी कमाई के दुरुपयोग को रोकने के लिए तत्काल प्रभाव से ट्रस्ट को भंग किया जाना चाहिए। केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई करने से दोषियों को नहीं बचाया जा सकता।
कांग्रेस का यह रुख आने वाले दिनों में मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर देश भर में एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दे सकता है।

