पटना। ​बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव ने नया मोड़ ले लिया है। भाजपा को नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के महज एक दिन बाद ही अपना उम्मीदवार बदलना पड़ा। पार्टी के इस फैसले ने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का बड़ा मौका दे दिया है।
​नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद रिक्त हुई बांकीपुर सीट पर भाजपा ने पहले अभिषेक सिन्हा को अपना प्रत्याशी बनाया था। लेकिन, नामांकन के ठीक बाद अभिषेक ने अपना नाम वापस लेने का ऐलान कर दिया। आनन-फानन में भाजपा ने नीरज सिन्हा को नया उम्मीदवार घोषित किया। नीरज सिन्हा पिछले 20 वर्षों से पार्टी के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हैं और वर्तमान में मंडल अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

​नामांकन रद्द होने का था डर

​सूत्रों के अनुसार, यह बदलाव किसी चुनावी रणनीति का हिस्सा नहीं, बल्कि मजबूरी थी। चर्चा है कि अभिषेक सिन्हा के नामांकन पत्र में परिवार और शिक्षा से जुड़ी जानकारी में कई विसंगतियां थीं। पार्टी को डर था कि जांच के दौरान चुनाव आयोग द्वारा नामांकन रद्द किया जा सकता है, जिससे भाजपा की किरकिरी होती। हालांकि, आधिकारिक तौर पर अभिषेक सिन्हा ने ‘पारिवारिक कारणों’ का हवाला दिया है।

​रोहिणी आचार्य ने घेरा

​भाजपा के इस ‘अंतिम समय के बदलाव’ पर लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा जो पार्टी नामांकन खत्म होने के तीन दिन पहले तक अपना दूल्हा तय नहीं कर पा रही, वह क्षेत्र का भविष्य क्या खाक तय करेगी? उन्होंने आगे कहा कि यह बदलाव बीजेपी के अंदर फैले चुनावी डर को दर्शाता है, क्योंकि उन्हें बांकीपुर में अपनी जमीन खिसकती हुई महसूस हो रही है।

​विपक्षी दलों की नजर

​इस पूरे घटनाक्रम पर प्रशांत किशोर की ‘जन सुराज पार्टी’ और राजद की पैनी नजर है। विपक्षी खेमा इसे मुद्दा बनाकर भाजपा की संगठनात्मक कमजोरी के रूप में पेश करने की तैयारी में है। अब देखना यह है कि क्या नया चेहरा भाजपा के लिए राहत लेकर आएगा या फिर चुनावी समीकरणों में और हलचल मचाएगा। ज्ञात हो कि बांकीपुर में मतदान 30 जुलाई को होना है और 3 अगस्त को परिणाम घोषित किए जाएंगे।