दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने श्रद्धा वॉकर (Shraddha Walker) हत्याकांड के आरोपी आफताब पूनावाला (Aftab Poonawala) के खिलाफ चल रहे ट्रायल की समयसीमा तय करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि मामले में किसी विशेष निर्देश की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि ट्रायल कोर्ट पहले से ही रोजाना सुनवाई कर रहा है और मुकदमे को जल्द से जल्द पूरा करने का प्रयास कर रहा है। जस्टिस मधु जैन की अदालत ने कहा कि निचली अदालत नियमित रूप से मामले की सुनवाई कर रही है और ट्रायल को शीघ्र समाप्त करने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है। ऐसे में हाईकोर्ट द्वारा अलग से कोई समयसीमा तय करना उचित नहीं होगा।
हाईकोर्ट श्रद्धा वॉकर के भाई द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था। याचिका में कहा गया कि परिवार अब तक श्रद्धा का अंतिम संस्कार नहीं कर पाया है, क्योंकि उनके शरीर के अवशेष अभी भी जांच एजेंसी और ट्रायल कोर्ट की अभिरक्षा में हैं। नियमों के अनुसार, ट्रायल पूरा होने के बाद ही ये अवशेष परिवार को सौंपे जा सकेंगे। सुनवाई के दौरान श्रद्धा के भाई की ओर से अदालत को बताया गया कि ट्रायल की वर्तमान गति को देखते हुए मामले के अगले पांच वर्षों तक लंबित रहने की आशंका है। याचिकाकर्ता पक्ष ने कहा कि इससे परिवार को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ सकता है और वे अपनी बहन का अंतिम संस्कार भी नहीं कर पा रहे हैं। याचिकाकर्ता के वकील ने ट्रायल कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि मामले में अभी भी 48 गवाहों की गवाही और जिरह बाकी है। ऐसे में ट्रायल पूरा होने में काफी समय लग सकता है। इसी आधार पर हाईकोर्ट से मामले के निस्तारण के लिए एक निश्चित समयसीमा तय करने का अनुरोध किया गया था।
दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि मामले में कुल 222 गवाहों को सूचीबद्ध किया गया है। इनमें से 157 गवाहों की गवाही पहले ही पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि केवल 6 गवाहों की गवाही शेष है, जिनमें गूगल और बम्बल से जुड़े चार विदेशी डेटा गवाह तथा एक नोडल अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा 14 गवाहों से जिरह (क्रॉस-एग्जामिनेशन) अभी बाकी है। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि ट्रायल कोर्ट नियमित और दैनिक आधार पर सुनवाई कर रहा है तथा मामले को शीघ्र समाप्त करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने किसी अलग समयसीमा या विशेष निर्देश की आवश्यकता से इनकार कर दिया।
दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अमित प्रसाद ने अदालत को बताया कि मामले की सुनवाई प्रतिदिन की जा रही है। उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने मई 2026 में पारित एक आदेश में आरोपी को पहले ही नोटिस देकर यह सुनिश्चित करने को कहा था कि उसका वकील नियमित रूप से अदालत में उपस्थित रहे। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि सप्ताहांत (वीकेंड) को छोड़कर मामले की रोजाना सुनवाई हो रही है। इन तथ्यों को रिकॉर्ड पर लेते हुए हाईकोर्ट ने माना कि ट्रायल कोर्ट मुकदमे को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए गंभीर प्रयास कर रहा है। अदालत ने कहा कि जब पहले से ही दैनिक सुनवाई चल रही है, तब इस स्तर पर किसी अतिरिक्त दिशा-निर्देश की आवश्यकता नहीं है। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत से अनुरोध किया गया था कि ट्रायल कोर्ट को समयबद्ध तरीके से मुकदमा समाप्त करने के लिए निर्देश दिए जाएं। हालांकि, हाईकोर्ट ने यह मांग स्वीकार करने से इनकार कर दिया और याचिका का निस्तारण कर दिया।
गौरतलब है कि आफताब पूनावाला पर वर्ष 2022 में अपनी लिव-इन पार्टनर श्रद्धा वॉकर की हत्या करने और शव के कई टुकड़े कर उन्हें विभिन्न स्थानों पर ठिकाने लगाने का आरोप है। यह मामला देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में से एक है और फिलहाल ट्रायल कोर्ट में इसकी सुनवाई जारी है।
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