कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके(Abhijit Dipke) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के खिलाफ कथित तौर पर अपशब्दों का इस्तेमाल करने के आरोप में एक महिला के खिलाफ दर्ज FIR पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि केवल गाली देना अपने आप में अपराध नहीं माना जा सकता और इस मामले में कार्रवाई को लेकर दोहरे मापदंड अपनाए जा रहे हैं। दीपके ने आरोप लगाया कि BJP के कुछ नेताओं और आईटी सेल से जुड़े लोगों द्वारा भी कई बार विरोधियों के खिलाफ अभद्र और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया है, लेकिन उनके खिलाफ वैसी कार्रवाई देखने को नहीं मिली। उन्होंने कहा कि कानून का पालन सभी के लिए समान रूप से होना चाहिए और किसी भी मामले में पक्षपात की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।

दीपके ने पूछा कि क्या देश में अलग-अलग लोगों के लिए अलग कानून हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की टिप्पणी के आधार पर एफआईआर दर्ज की जा रही है, तो उन मामलों में भी समान कार्रवाई होनी चाहिए जहां राजनीतिक नेताओं या सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों द्वारा आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया है।

सीजेपी की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए एक वीडियो में दीपके ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि अपशब्दों का इस्तेमाल करने के आरोप में एक महिला के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने पूछा कि अन्य मामलों में ऐसी कार्रवाई क्यों नहीं की गई। दीपके ने कहा, “अगर गाली-गलौज के लिए मामले दर्ज किए जा रहे हैं, तो भाजपा की आईटी सेल से जुड़े उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी, जो वर्षों से सोशल मीडिया पर महिलाओं के लिए अपमानजनक और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते रहे हैं?” उन्होंने आरोप लगाया कि कानून का इस्तेमाल चयनात्मक तरीके से नहीं होना चाहिए और सभी नागरिकों के लिए एक समान मानदंड लागू होने चाहिए। दीपके ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या देश में दो तरह के कानून लागू हैं, जहां कुछ मामलों में तत्काल कार्रवाई होती है जबकि अन्य मामलों को नजरअंदाज कर दिया जाता है।

बीजेपी नेताओं और आईटी सेल पर उठाए सवाल

दीपके ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर खुद को भाजपा समर्थक बताने वाले कई यूजर्स वर्षों से महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग महिलाओं और लड़कियों के प्रति असम्मानजनक व्यवहार करते हैं, लेकिन उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने सवाल किया कि यदि गाली-गलौज के लिए मामले दर्ज किए जा रहे हैं, तो ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई कब की जाएगी।

सीजेपी प्रमुख ने भाजपा नेताओं की कुछ पुरानी टिप्पणियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल भाजपा की आईटी सेल तक सीमित नहीं है। दीपके ने भाजपा सांसद Ramesh Bidhuri का नाम लेते हुए कहा कि उन्होंने एक साथी सांसद के लिए जिन शब्दों का इस्तेमाल किया था, वह सभी को याद है। उन्होंने सवाल उठाया कि उस मामले में वैसी कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई जैसी अब की जा रही है। दीपके ने आरोप लगाया कि कानून का पालन सभी नागरिकों और राजनीतिक दलों के नेताओं पर समान रूप से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि चयनात्मक कार्रवाई से निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं और इससे यह धारणा बनती है कि अलग-अलग लोगों के लिए अलग मानदंड अपनाए जा रहे हैं।

क्या देश में दो कानून हैं?

उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी उल्लेख किया और दावा किया कि एक वीडियो में उन्होंने एक कैमरा पर्सन के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया था। दीपके ने कहा, “क्या इस देश में दो कानून हैं? युवाओं के लिए अलग कानून और BJP तथा उसके नेताओं के लिए अलग कानून?” उन्होंने आरोप लगाया कि कानून का इस्तेमाल सभी लोगों पर समान रूप से होना चाहिए और चयनात्मक कार्रवाई से निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि केवल अपशब्दों के इस्तेमाल को आधार बनाकर आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, ऐसी टिप्पणियों पर कार्रवाई के लिए समान और स्पष्ट मानदंड होने चाहिए, जो सभी पर एक समान लागू हों।

गाली देना गलत है, लेकिन क्या यह अपराध है?

दीपके ने कहा, “गाली देना बुरी बात है। उस व्यक्ति को समझाया जाना चाहिए कि ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, लेकिन सवाल यह है कि केस क्यों दर्ज किया जा रहा है?” उन्होंने दावा किया कि यदि गाली-गलौज के मामलों में एफआईआर दर्ज करने का मानदंड अपनाया जाता है, तो यह नियम सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर भाजपा की आईटी सेल से जुड़े या खुद को भाजपा समर्थक बताने वाले कई लोग वर्षों से महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते रहे हैं। दीपके ने कहा कि यदि इसी आधार पर कार्रवाई की जाए तो सबसे अधिक मामले ऐसे लोगों के खिलाफ दर्ज होंगे।

दरअसल, दीपके की यह टिप्पणी रुचिका सिंह के खिलाफ नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में जीरो एफआईआर दर्ज होने के एक दिन बाद आई है। आरोप है कि 23 जुलाई को जंतर-मंतर पर आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपमानजनक और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था। पुलिस के अनुसार, यह एफआईआर गाजियाबाद निवासी स्मृति सिंह  की शिकायत पर दर्ज की गई। मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान), धारा 353(1) (सार्वजनिक अशांति फैलाने वाले बयान) और धारा 356(1) (मानहानि) के तहत दर्ज किया गया है। पुलिस ने बताया कि यह जीरो एफआईआर है और आगे की जांच के लिए इसे नई दिल्ली स्थानांतरित किया जाएगा। मामले में जांच जारी है और संबंधित तथ्यों की पड़ताल की जा रही है।

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