Ranji Trophy 2026-27: भारतीय क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित घरेलू टूर्नामेंट रणजी ट्रॉफी के नए सीजन का काउंटडाउन शुरू हो गया है। रणजी ट्रॉफी 2026-27 की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026 से होगी। इस बार टूर्नामेंट को एक साथ लगातार कराने के बजाय दो चरणों में आयोजित किया जाएगा।

BCCI ने टूर्नामेंट के कार्यक्रम में यह बदलाव खिलाड़ियों के वर्कलोड को ध्यान में रखते हुए किया है। खासतौर पर तेज गेंदबाजों की फिटनेस और उत्तर भारत में सर्दियों के दौरान कोहरे से मैचों पर पड़ने वाले असर को देखते हुए रणजी सीजन को दो हिस्सों में बांटा गया है।

11 अक्टूबर से 5 नवंबर तक पहला चरण

रणजी ट्रॉफी के पहले चरण में एलीट और प्लेट ग्रुप के लीग मुकाबले खेले जाएंगे। यह फेज 11 अक्टूबर से 5 नवंबर 2026 तक चलेगा। इसके बाद घरेलू क्रिकेट कैलेंडर के दूसरे टूर्नामेंट्स के लिए रणजी ट्रॉफी में ब्रेक रहेगा।

दूसरे चरण में मुकाबले 17 जनवरी से 4 फरवरी 2027 तक होंगे। लीग चरण पूरा होने के बाद नॉकआउट मुकाबलों की बारी आएगी।

क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबले 9 फरवरी से 3 मार्च 2027 के बीच खेले जाएंगे। यानी रणजी ट्रॉफी के चैंपियन का फैसला मार्च की शुरुआत तक हो जाएगा।

बीच में क्यों लिया गया ब्रेक?

BCCI का यह शेड्यूल खिलाड़ियों के लिए खास तौर पर वर्कलोड मैनेजमेंट को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। दिसंबर-जनवरी के दौरान सफेद गेंद के घरेलू टूर्नामेंट भी खेले जाएंगे। ऐसे में खिलाड़ियों को अलग-अलग फॉर्मेट के बीच पर्याप्त समय देने की कोशिश की गई है।

इस दौरान सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 14 नवंबर से 6 दिसंबर 2026 तक होगी। इसके बाद विजय हजारे ट्रॉफी 14 दिसंबर 2026 से 8 जनवरी 2027 तक खेली जाएगी।

उत्तर भारत में दिसंबर और जनवरी के दौरान कोहरे की वजह से मैचों में आने वाली दिक्कत भी BCCI के इस फैसले की बड़ी वजह है। इसके अलावा तेज गेंदबाजों पर लगातार क्रिकेट का बोझ कम करना भी योजना का हिस्सा है।

रणजी में खेल सकते हैं टीम इंडिया के बड़े नाम

रणजी ट्रॉफी के आगामी सीजन में भारतीय टेस्ट टीम के कई बड़े खिलाड़ी भी घरेलू क्रिकेट में नजर आ सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, BCCI ने भारतीय टेस्ट खिलाड़ियों को सीजन में कम से कम एक रणजी मुकाबला खेलने के लिए कहा है।

हालांकि, खिलाड़ियों की उपलब्धता मेडिकल क्लियरेंस और वर्कलोड मैनेजमेंट पर निर्भर करेगी। BCCI की कोशिश है कि टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले सीनियर खिलाड़ी घरेलू लाल गेंद क्रिकेट से जुड़े रहें।

इस लिस्ट में शुभमन गिल, केएल राहुल और जसप्रीत बुमराह जैसे नाम शामिल हैं। गिल पंजाब और राहुल कर्नाटक के लिए खेलते दिखाई दे सकते हैं। वहीं बुमराह के मामले में उनके वर्कलोड को देखते हुए फैसला लिया जाएगा।

अगर बुमराह रणजी ट्रॉफी में नहीं खेल पाते हैं, तो उनके लिए इंडिया A की ओर से एक फर्स्ट क्लास मुकाबला खेलने का विकल्प भी सामने रखा गया है।

आकाश दीप और नीतीश कुमार रेड्डी पर भी नजर

चयनकर्ताओं की नजर आकाश दीप और नीतीश कुमार रेड्डी पर भी रहने वाली है। दोनों खिलाड़ी हाल के समय में चोटों से परेशान रहे हैं। ऐसे में रणजी मुकाबले उनकी फिटनेस और मैच प्रैक्टिस को परखने का अहम मौका बन सकते हैं।

BCCI की रणनीति का एक हिस्सा खिलाड़ियों को लंबे फॉर्मेट के लिए तैयार रखना भी है। भारत को आगे न्यूजीलैंड दौरे पर दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेलनी है। ऐसे में सीनियर खिलाड़ियों को लाल गेंद के क्रिकेट में उतारने के पीछे टेस्ट सीरीज की तैयारी भी एक अहम वजह मानी जा रही है।

सफेद गेंद के क्रिकेट के बाद लौटेंगे रेड-बॉल विशेषज्ञ

रणजी ट्रॉफी के पहले और दूसरे चरण के बीच होने वाले सफेद गेंद के टूर्नामेंट घरेलू खिलाड़ियों के लिए भी अहम होंगे। सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी और विजय हजारे ट्रॉफी में खिलाड़ी टी20 और वनडे क्रिकेट में अपनी क्षमता दिखा सकेंगे।

खास तौर पर IPL नीलामी से पहले टी20 क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों के पास अपनी दावेदारी मजबूत करने का मौका होगा। वहीं सफेद गेंद के मुकाबले खत्म होने के बाद रेड-बॉल विशेषज्ञ एक बार फिर रणजी ट्रॉफी के दूसरे चरण में लौटेंगे।

1,788 घरेलू मुकाबलों का बड़ा कैलेंडर

BCCI के घरेलू कैलेंडर में इस सीजन कुल 1,788 मुकाबले खेले जाने हैं। इनमें रणजी ट्रॉफी सबसे प्रमुख टूर्नामेंटों में शामिल है।

दो चरणों में होने वाली रणजी ट्रॉफी का मकसद सिर्फ मैचों की संख्या और तारीखों को व्यवस्थित करना नहीं है, बल्कि खिलाड़ियों की फिटनेस, मौसम और अलग-अलग फॉर्मेट के बीच संतुलन बनाना भी है। अब नजर 11 अक्टूबर से शुरू होने वाले पहले चरण पर रहेगी, जहां भारतीय टेस्ट टीम के कई बड़े खिलाड़ियों समेत घरेलू क्रिकेट के कई बड़े नाम मैदान पर उतर सकते हैं।

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