वाराणसी में महाआंदोलन के लिए जिला मुख्यालय पहुंचे करणी सेना के 150 से अधिक कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया. पुलिस ने अनुमति नहीं होने का हवाला दिया, जबकि प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण आंदोलन की अनुमति नहीं देने का आरोप लगाया.

वाराणसी. जिला मुख्यालय पर महाआंदोलन करने पहुंचे राजपूत करणी सेना के 150 से अधिक कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया. संगठन ने आरक्षण, सवर्ण आयोग के गठन और यूजीसी में संशोधन समेत कई मांगों को लेकर प्रदर्शन का ऐलान किया था. पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं ली गई थी.

अनुमति नहीं मिलने पर कार्रवाई

करणी सेना की ओर से वाराणसी जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन की तैयारी की गई थी. महाआंदोलन के ऐलान के बाद बड़ी संख्या में कार्यकर्ता वहां पहुंचने लगे. पुलिस ने उन्हें प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने की जानकारी दी और वापस जाने के लिए समझाने की कोशिश की.

एडीसीपी लिपि नागयाच ने बताया कि कार्यकर्ताओं को समझाने के बावजूद वे जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन करने की मांग पर अड़े रहे. इसके बाद पुलिस ने डेढ़ सौ से अधिक लोगों को हिरासत में लेकर वहां से हटाया. उन्हें पुलिस वाहनों से पुलिस लाइन ले जाया गया, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे.

कार्यकर्ताओं ने लगाया आरोप

प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं का कहना था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने आए थे. उन्होंने अधिकारियों को पहले ही मांग पत्र सौंपने और शांतिपूर्वक धरना देने की बात कही थी.

कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें अनुमति नहीं दी गई और पुलिस ने जबरन वाहनों में बैठाकर वहां से हटा दिया. उनका कहना था कि वे अपनी मांगों को लेकर आंदोलन आगे बढ़ाना चाहते थे, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई.

करणी सेना के प्रस्तावित आंदोलन में कई मुद्दे उठाए गए थे. इनमें आरक्षण को आर्थिक आधार पर लागू करने, सवर्ण आयोग गठित करने और यूजीसी में वर्ष 2026 के संशोधन से जुड़ी मांगें शामिल थीं.

आरक्षण और यूजीसी संशोधन की मांग

इसके अलावा संगठन ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति से जुड़े प्रावधानों की समीक्षा, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी ईडब्ल्यूएस के प्रावधानों को सरल बनाने और इतिहास के संरक्षण की मांग भी रखी थी.

पहले भी हुआ था प्रदर्शन

वाराणसी में इससे पहले भी करणी सेना की ओर से कई दिनों तक धरना-प्रदर्शन और आमरण अनशन किए जाने की जानकारी सामने आई थी. मौजूदा प्रदर्शन का उद्देश्य संगठन की मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखना था.

फिलहाल, जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने 150 से अधिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर वहां से हटा दिया.