Karwa Chauth Moonrise Time 2026: आज, 29 अक्टूबर को करवा चौथ का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस दिन विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखती हैं। दिनभर व्रत रखने के बाद महिलाओं को रात में चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य देने का इंतजार रहता है।
हालांकि, झारखंड में बारिश और आसमान में बादल छाए रहने के कारण चांद देखने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में अगर मौसम साफ रहता है, तो झारखंड के अलग-अलग शहरों में चंद्रमा के दर्शन संभावित रूप से किस समय हो सकते हैं, आइए जानते हैं।
झारखंड में करवा चौथ पर कब निकलेगा चांद?
करवा चौथ पर चंद्रोदय का समय शहर और भौगोलिक स्थिति के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है। नीचे दिए गए समय संभावित हैं। बादलों और स्थानीय मौसम की स्थिति के कारण चांद दिखाई देने में देरी हो सकती है।
| शहर | संभावित चंद्रोदय का समय |
|---|---|
| रांची | रात 7:53 बजे |
| जमशेदपुर | रात 7:50 बजे |
| धनबाद | रात 7:52 बजे |
| बोकारो स्टील सिटी | रात 7:48 बजे |
| हजारीबाग | रात 7:51 बजे |
| गिरिडीह | रात 7:51 बजे |
| देवघर | रात 7:49 बजे |
| रामगढ़ | रात 7:58 बजे |
ध्यान दें: ये समय उपलब्ध जानकारी के आधार पर संभावित चंद्रोदय समय हैं। व्रत खोलने से पहले स्थानीय पंचांग या विश्वसनीय खगोलीय समय-सारिणी से पुष्टि कर लें। बादल छाए रहने पर चंद्रमा निकलने के बावजूद उसके दर्शन नहीं हो सकते।
सरगी से चंद्रमा की पूजा तक, ऐसे पूरा होता है व्रत
करवा चौथ के दिन कई महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण कर व्रत की शुरुआत करती हैं। सरगी में फल, मिठाई, सूखे मेवे और अन्य खाद्य पदार्थ शामिल किए जाते हैं। इसके बाद महिलाएं दिनभर व्रत रखती हैं और शाम को पूजा की तैयारी करती हैं।
शाम को करवा चौथ की पूजा और व्रत कथा सुनने की परंपरा है। रात में चंद्रमा के दर्शन होने पर महिलाएं अर्घ्य अर्पित करती हैं और पति की लंबी उम्र व परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। इसके बाद कई परिवारों में पति के हाथ से जल ग्रहण कर व्रत खोलने की परंपरा निभाई जाती है।
करवा चौथ का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, करवा चौथ पति-पत्नी के प्रेम, विश्वास और सुखी वैवाहिक जीवन का प्रतीक है। इस दिन महिलाएं पति के अच्छे स्वास्थ्य, दीर्घायु और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करती हैं।
करवा चौथ की पूजा-विधि और रीति-रिवाज अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में भिन्न हो सकते हैं। इसलिए पूजा और व्रत के पारण के लिए अपनी पारिवारिक परंपरा तथा स्थानीय पंचांग का ध्यान रखें।

