Dharm Desk : करवा चौथ का व्रत कल यानि 29 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। व्रत रखने वाली महिलाएं सूर्योदय से चंद्रोदय तक पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। इस पर्व में व्रत के साथ शाम की पूजा, करवा पूजन, कथा और चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है। इसलिए पूजा के समय किसी अनिवार्य वस्तु की कमी न रह जाए इसके लिए सामग्री पहले से एकत्रित करना अच्छा रहता है।पूजा की सामग्री परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है लेकिन कुछ वस्तुएं लगभग हर घर में उपयोग की जाती हैं।
चौकी से लेकर करवा तक यह सामान रखें
पूजा के लिए सबसे पहले एक साफ चौकी और उस पर बिछाने के लिए लाल या पीला कपड़ा रखा जाता है। भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा माता की तस्वीर या प्रतिमा पूजा स्थल पर रखी जाती है। इसके साथ ही मिट्टी या धातु का करवा, ढक्कन, जल, रोली, अक्षत, हल्दी, कुमकुम, मौली, फूल, धूप, दीपक और घी या तेल अन्य सामग्री होनी चाहिए।
कई परिवारों में करवा के साथ छोटी सी सींक या लकड़ी की डंडी, छलनी और चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए अलग पात्र भी रखा जाता है। पूजा के बाद इसी छलनी से चंद्रमा और फिर पति का चेहरा देखने की परंपरा निभाई जाती है। थाली में मिठाई, फल, मेवे और घर में प्रचलित प्रसाद भी रखा जाता है।
सुहाग सामग्री और बायना का रखें ध्यान
करवा चौथ पर महिलाएं सोलह श्रृंगार से जुड़ी वस्तुएं भी पूजा में शामिल करती हैं। इसमें सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां, मेहंदी, कंघी, काजल, चुनरी, मंगलसूत्र और अन्य सुहाग सामग्री रखी जा सकती है।बहुत से परिवारों में बहू अपनी सास को बायना देती है। इसमें कपड़े, मिठाई, फल, मेवे और सुहाग की वस्तुएं होती है।
बायना की सामग्री हर क्षेत्र और परिवार में अलग होती है। इसलिए किसी एक सूची को अनिवार्य मानने के बजाय अपनी पारिवारिक परंपरा को प्राथमिकता दें।

कथा-पुस्तक और चंद्र अर्घ्य का पात्र पहले तैयार करें
करवा चौथ की कथा सुनने के लिए कथा-पुस्तक या परिवार में प्रचलित कथा का पाठ पहले से तैयार रखें। कुछ स्थानों पर महिलाएं सामूहिक रूप से कथा सुनती हैं और पूजा के दौरान थाली बदलने या घुमाने की परंपरा भी निभाती हैं। यदि घर में बुजुर्ग महिला कथा सुनाती हैं तो उनके बैठने की जगह और पूजा सामग्री पहले से व्यवस्थित कर लें।
चंद्र दर्शन के समय चंद्रमा को जल अर्पित करने के लिए लोटा या करवे में साफ पानी रखें। चांद दिखाई देने के बाद पूजा पूरी करके व्रत खोलें
एक दिन पहले पूरी कर लें तैयारी
करवा चौथ की पूजा सामग्री आज शाम तक एक जगह एकत्रित कर ले। करवा, छलनी, दीपक, कथा-पुस्तक, सुहाग सामग्री और अर्घ्य के पात्र को अलग थाली में सजाकर रखने से पूजा के समय जल्दबाजी नहीं होगी। अगर परिवार में विशेष रीति, बायना या करवा बदलने की परंपरा है, तो उसकी जानकारी भी पहले से तय कर लें।

