Dharm Desk :- करवा चौथ का व्रत शादी के बाद कई महिलाओं के लिए खास अनुभव होता है। पहली बार व्रत रखने वाली सुहागिनों के मन में अक्सर सवाल रहता है कि सरगी कब खानी चाहिए। पूजा की थाली में क्या रखना जरूरी है। कथा कब सुननी चाहिए और चंद्रमा निकलने पर व्रत खोलने की सही विधि क्या है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से व्रत रखती है। इसलिए पर्व की तैयारियों के साथ पूजा की परंपराओं को समझना भी जरूरी है । इस वर्ष करवा चौथ 29 अक्टूबर, गुरुवार को मनाया जाएगा।
व्रत की शुरुआत सुबह सरगी से होती है
करवा चौथ पर सरगी खाने की परंपरा है । आमतौर पर सास अपनी बहू को सरगी देती हैं, जिसमें फल, मिठाई, सूखे मेवे और दूसरी खाने की चीजें शामिल रहती है, महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी खाकर व्रत शुरू करती हैं। इसके बाद अपनी परंपरा के अनुसार दिनभर अन्न और जल का त्याग करती हैं।
पहली बार व्रत रखने वाली महिलाओं को ध्यान रखना चाहिए
सरगी में बहुत अधिक तली-भुनी या नमकीन चीजें लेने के बजाय पौष्टिक भोजन चुनें। यदि किसी महिला को मधुमेह, दूसरी बीमारी या नियमित दवा लेने की जरूरत है, तो निर्जला व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना उचित है। स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरतों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए।

करवा चौथ की पूजा की थाली में क्या रखें
शाम की पूजा के लिए महिलाएं पहले से थाली तैयार कर सकती हैं। इसमें रोली, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई, जल से भरा करवा और पूजा की अन्य सामग्री रखी जाती है । कई परिवारों में करवा चौथ की कथा सुनने और सुहाग की सामग्री का आदान-प्रदान करने की परंपरा भी है। पूजा के समय भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा माता का स्मरण किया जाता है। परिवार और क्षेत्र के अनुसार पूजा की विधि में कुछ अंतर हो सकता है। इसलिए पहली बार व्रत रखने वाली महिलाएं अपने घर की परंपरा के अनुसार तैयारी कर सकती हैं।
कथा सुनने के बाद चंद्र दर्शन का इंतजार
करवा चौथ पर शाम को महिलाएं एक साथ बैठकर व्रत कथा सुनती है । इसके बाद चंद्रमा निकलने का इंतजार किया जाता है। चंद्र दर्शन होने पर महिलाएं परंपरा के अनुसार, चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं और छलनी से चंद्रमा तथा फिर पति का चेहरा देखती हैं। इसके बाद पति के हाथों जल ग्रहण करके व्रत खोलने की परंपरा है।
पहली बार व्रत रखने वाली महिलाएं इन बातों का रखें ध्यान
व्रत के लिए जरूरी सामान एक दिन पहले तैयार कर लें। पूजा का समय और अपने शहर का चंद्रोदय समय देख लें। पूरे दिन की व्यस्तता कम रखने की कोशिश करें, ताकि पूजा के सयम जल्दबाजी न हो।

