Dharm Desk – सुहागिन महिलाओं का प्रमुख पर्व करवा चौथ आज, 29 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के साथ महिलाएं सुबह से निर्जला व्रत रखे हुए हैं। दिनभर व्रत रखने के बाद अब सभी को शाम की पूजा के शुभ मुहूर्त और चंद्रमा के दर्शन का इंतजार है। महिलाएं पूजा की थाली सजा रही हैं। करवा माता की पूजा की तैयारियों में जुटी हैं। शाम को विधि-विधान से पूजा और कथा के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाएगा। इसके बाद पति के हाथों जल ग्रहण करके व्रत का पारण किया जाएगा।
करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त
आज करवा चौथ की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:38 बजे से 6:56 बजे तक है। पूजा का सयम नजदीक आने के साथ ही महिलाएं अपनी तैयारियां पूरी कर रही हैं। इस दौरान करवा माता की पूजा, दीप प्रज्वलन और कथा श्रवण किया जाएगा। पूजा की थाली में रोली, अक्षत, पुष्प, मिठाई, दीपक और जल से भरा करवा रखा जाता है। महिलाएं पूजा के दौरान पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगी।
करवा चौथ पर कब होंगे चंद्रमा के दर्शन
पूजा के बाद अब महिलाओं को चंद्रोदय का इंतजार रहेगा। चंद्रमा निकलने पर महिलाएं छलनी से चंद्रमा के दर्शन करेंगी। अर्घ्य अर्पित करेंगी। इसके बाद पति का चेहरा देखकर उनके हाथों से जल ग्रहण किया जाएगा। इसी के साथ दिनभर रखा गया निर्जला व्रत पूरा होगा। चंद्रोदय का समय छत्तीसगढ़ में 8:18 से शुरू होगा।
करवा चौथ की पूजा इस विधि से करें
पूजा स्थल पर चौकी रखकर करवा माता का चित्र स्थापित करें। दीपक जलाएं और रोली, अक्षत, पुष्प तथा मिठाई अर्पित करें। जल से भरा करवा पूजा में रखें। इसके बाद करवा चौथ की कथा सुनें या पढ़ें और माता से सुखी दांपत्य जीवन की प्रार्थना करें। पूजा के दौरान परिवार की सुख-समृद्धि और पति के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करें। पूजा संपन्न होने के बाद चंद्र दर्शन और अर्घ्य की तैयारी करें।
इस मंत्र का जाप करवा चौथ पर करें
करवा चौथ की पूजा में माता पार्वती और भगवान शिव का स्मरण किया जाता है। इस दौरान माता पार्वती के इस मंत्र का जाप कर सकती हैं।
ॐ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते॥
मंत्र जाप के दौरान महिलाएं अपने परिवार की सुख-शांति और दांपत्य जीवन की मंगलकामना करें।
पूजा के बाद करें आरती
करवा चौथ की पूजा में आरती का विशेष स्थान है। महिलाएं दीपक जलाकर करवा माता की आरती करें और परिवार के मंगल की प्रार्थना करें। आरती के बाद चंद्रमा निकलने की प्रतीक्षा करें। चंद्र दर्शन होने पर अर्घ्य देकर पति की लंबी आयु की कामना करें। उनके हाथों से जल ग्रहण करके व्रत खोलें।

