Dharm Desk :- साल भर इंतजार के बाद आने वाला करवा चौथ व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए खास होता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ व्रत रखती हैं। इस पर्व पर मंदिरों में पूजा-अर्चना होती है, लेकिन मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित चौथ माता का एक ऐसा मंदिर भी है, जो अपनी अनोखी परंपरा के कारण चर्चा में रहता है। यहां साल में केवल करवा चौथ के दिन मंदिर के कपाट खुलते हैं। इस दिन माता के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंचती हैं और अपने दांपत्य जीवन की खुशहाली की कामना करती हैं।
जीवनखेड़ी गांव में स्थित है मंदिर
उज्जैन के जीवनखेड़ी गांव में, उन्हेल बायपास के पास स्थित चौथ माता मंदिर करवा चौथ के अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण बनता है। मंदिर के कपाट साल में केवल करवा चौथ पर खोले जाते हैं। मंदिर में देवी पार्वती के साथ ऋद्धि-सिद्धि, लाभ-शुभ और संतोषी माता की प्रतिमाएं भी विराजमान हैं।
तीन रूपों में दर्शन की परंपरा
इस मंदिर से जुड़ी एक और खास बात माता के अलग-अलग स्वरूपों के दर्शन की है। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, करवा चौथ पर सुबह माता के बाल रूप, दोपहर में किशोरी रूप और शाम को दूसरे विशेष स्वरूप में दर्शन की परंपरा बताई गई है। इसी वजह से यह मंदिर श्रद्धालुओं के बीच विशेष पहचान रखता है। मंदिर में पूजा के बाद चुनरी, कुमकुम और रुद्राक्ष जैसी वस्तुएं प्रसाद के रूप में दी जाती है।

करवा चौथ पर क्यों खास है दर्शन
करवा चौथ पर महिलाएं माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करके अपने वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की कामना करती हैं। ऐसे में चौथ माता मंदिर की परंपरा इस पर्व को एक अलग धार्मिक पहचान देती है। सालभर बंद रहने वाले मंदिर के कपाट खुलने और दर्शन के लिए महिलाओं की लाइन लगती है।

