Kathua CISF Firing And Murder Case: जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के कठुआ में सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स यानी सीआईएसएफ कैंप के अंदर सीआईएसएफ जवान अवधेश सिंह ने अपने ही 4 साथियों को AK-47 से भून डाला। सीआईएसएफ कैंपस के अंदर ही इस हत्याकांड ने हर किसी को झकझोर दिया है। मरने वालों में असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडे भी हैं। इनके अलावे सब इंस्पेक्टर लक्ष्मण सिंह, कांस्टेबल रफीक अहमद और कांस्टेबल संजीव कुमार की मौत हो गई। घटना के बाद CISF ने कोर्ट ऑफ इंक्वायरी गठित कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि एक सवाल सबके सामने फिर आ गया है कि जवान अपने ही साथियों की जानें क्यों ले रहे हैं?
घटना की जांच कर रहे एक पुलिस ऑफिसर ने बताया कि आरोपी जवान की बच्चे को कैंप में बार-बार लाने को लेकर अपने साथियों और असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडे से झगड़ा हुआ था। इसी बात को लेकर यह हत्याकांज को अंजाम दे डाला।
बिहार निवासी सीआईएसएफ के हेड कांस्टेबल अवधेश सिंह ने 29 सितंबर की शाम करीब 6:40 बजे ये पूरा खूनी खेल खेला। सेवा-2 हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ हेड कांस्टेबल अवधेश सिंह अपनी AK-47 राइफल लेकर ऑफिस में घुस गया और अचानक अपने ही साथियों पर AK-47 से ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दी और कुछ ही देर में असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडे, एसआई लक्ष्मण सिंह, कॉन्स्टेबल रफीक अहमद और कॉन्स्टेबल संदीप कुमार की मौत हो गई। रोपी जवान अभिदेश कुमार सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है।

बच्चे को बार-बार साइट पर लाने से विवाद और हो गया कांड
पुलिस ऑफिसर के मुताबिक आरोपी हेड कांस्टेबल अवधेश कुमार सिंह और उसकी पत्नी भी CISF में तैनात हैं। दोनों एक ही प्रोजेक्ट साइट पर अलग-अलग शिफ्ट में ड्यूटी करते थे। इसलिए, जब कोई एक पेरेंट ड्यूटी पर आता, तो वे बच्चे को साथ लाते और घर लौट रहे पति/पत्नी को सौंप देते थे। उन्हें बच्चे को बार-बार प्रोजेक्ट साइट पर लाना पड़ता था। इसे लेकर उसके साथी इससे नाराज रहते थे। इस संबंध में पहले भी अवधेश कुमार सिंह और उसकी पत्नी को बच्चे को बार-बार साइट नहीं लाने की वॉर्निंग दी जा चुकी थी। घटना वाले दिन भी आरोपी की पत्नी पूजा अपने बच्चे को लेकर गार्ड क्वार्टर पहुंच गई। इसकी शिकायत साथियों ने असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडे से कर दी। इससे नाराज अवधेश कुमार सिंह मंगलवार शाम गेट के पास स्थित ऑपरेशंस सेक्शन के कार्यालय में पहुंचा। वहां कंपनी कमांडर अंकित कुमार पांडेय समेत चार कर्मी मौजूद थे। उसने सरकारी AK-47ल से अंधाधुंध फायरिंग कर दी।
चंबा के एनएचपीसी अस्पताल में नहीं बची जान
फायरिंग में घायल असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडेय, एसआई लक्ष्मण सिंह, कांस्टेबल रफीक अहमद और कांस्टेबल संजीव कुमार को गंभीर हालत में हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में स्थित एनएचपीसी के अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने चारों को मृत घोषित कर दिया।
पत्नी को प्रवेश न देने से नाराज था अवधेश
एसएसपी मोहिता शर्मा ने बताया, आरोपी अवधेश की पत्नी भी सीआईएसएफ में कांस्टेबल है। वह अक्सर बच्चे के साथ क्वार्टर गार्ड आ जाती थीं, जबकि यूनिट प्रशासन से इसकी अनुमति नहीं थी। इसी बात पर विवाद बढ़ा और अवधेश ने सर्विस राइफल से फायरिंग शुरू कर दी।
एके-47 से की फायरिंग, 150 राउंड थे पास
जांच में सामने आया है कि वारदात के समय उसके पास करीब 150 राउंड गोलियां थीं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार विवाद की शुरुआत असिस्टेंट कमांडेंट एवं कंपनी कमांडर अंकित कुमार पांडेय के साथ हुई थी। इसके बाद अवधेश ने फायरिंग शुरू कर दी। कैंप में अचानक हुई फायरिंग से अफरातफरी मच गई और चार जवान इसकी चपेट में आ गए।
2009 में सीआईएसएफ में भर्ती हुआ था अवधेश
सूत्रों के अनुसार अवधेश सिंह वर्ष 2009 में सीआईएसएफ में भर्ती हुआ था। घटना के बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
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