अनूप दुबे, ढीमरखेड़ा (कटनी)। कटनी जिले के ढीमरखेड़ा तहसील क्षेत्र स्थित दतला नदी में लंबे समय से धड़ल्ले से चल रहे रेत के अवैध उत्खनन के खिलाफ प्रशासन ने शिकंजा कस दिया है। कलेक्टर और एसपी के सख्त निर्देशों के बाद अब कार्रवाइयों में तेजी आ गई है। इसी क्रम में खनिज और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने लगातार दूसरे दिन दतला नदी के अवैध घाटों पर जेसीबी चलवाकर रास्ते बंद करने की बड़ी कार्रवाई की है।

इन गांवों के अवैध घाटों पर की गई कार्रवाई
सोमवार को सहायक जिला खनिज अधिकारी कमल परस्ते और चौकी प्रभारी अनिल पांडे के नेतृत्व में खनिज और पुलिस विभाग की टीम ने दतला, सगवा, लालपुर और दशरमन गांव के पास संचालित हो रहे अवैध रेत घाटों पर जेसीबी चलवाई। इससे पहले रविवार को भी एडिशनल एसपी कमल मौर्य, जिला खनिज अधिकारी रत्नेश दीक्षित, थाना प्रभारी महिमा रघुवंशी और चौकी प्रभारी अनिल पांडे ने दतला नदी के अवैध घाटों पर जेसीबी चलवाकर मार्ग अवरुद्ध किए थे। ग्रामीणों के अनुसार तकरीबन 30 किलोमीटर के इस पूरे दायरे में नदी के भीतर करीब एक दर्जन अवैध घाटों से करोड़ों रुपए की रेत निकालकर सरकार के राजस्व को भारी क्षति पहुंचाई गई है, जिसमें जिम्मेदारों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

अवैध गड्ढे में डूबने से हो चुकी है बच्चे की मौत
लालपुर गांव के स्थानीय ग्रामीणों ने दर्द बयां करते हुए बताया कि उनके गांव की नदी से लंबे समय से अवैध रूप से रेत का उत्खनन किया जा रहा था। स्थानीय प्रशासन को इस संबंध में कई बार लिखित और मौखिक जानकारी दी गई थी लेकिन इसके बावजूद पहले कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी थी कि रेत माफियाओं द्वारा नदी में खोदे गए गहरे गड्ढों में डूबने के कारण गांव के एक मासूम बच्चे की भी मौत हो चुकी है। इतनी बड़ी दुर्घटना होने के बावजूद माफियाओं पर समय रहते शिकंजा नहीं कसा गया था। अब ग्रामीणों ने राज्य सरकार और प्रशासन से मांग की है कि नदी से रेत चोरी कर सरकार को राजस्व का चूना लगाने वालों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों तथा लापरवाह खनिज व पुलिस अधिकारियों से इसकी वसूली की जाए।

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