नरेश शर्मा, रायगढ़। जिले में भारी बारिश के बीच केलो डैम में जलभराव बढ़ने के बाद जिला प्रशासन ने आज डैम के छह गेट खोल दिए। गेट खुलने के साथ ही केलो नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा और शहर के चक्रपथ मार्ग पर पानी भर गया। देखते ही देखते चक्रपथ पूरी तरह जलमग्न हो गया, जिसके बाद यातायात का पूरा दबाव चक्रधर नगर रोड और कलेक्ट्रेट की ओर जाने वाले ओवरब्रिज पर आ गया। नतीजा यह रहा कि शहर के प्रमुख मार्गों पर भीषण जाम की स्थिति निर्मित हो गई।

चक्रपथ डूबा तो चरमराई शहर की यातायात व्यवस्था
चक्रपथ के बंद होते ही वैकल्पिक मार्गों पर वाहनों का दबाव अचानक बढ़ गया। चक्रधर नगर और कलेक्ट्रेट ओवरब्रिज पर कार, बस, पिकअप और सैकड़ों दोपहिया वाहन एक-दूसरे के पीछे फंस गए। कई स्थानों पर स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि वाहनों को आगे बढ़ने तक की जगह नहीं मिल रही थी।

सबसे चिंताजनक स्थिति स्कूली बच्चों को लेकर जा रही बसों की रही। जाम में कई स्कूली बसें घंटों फंसी रहीं। वहीं मरीज को लेकर जा रही एंबुलेंस भी जाम की चपेट में आ गई। एंबुलेंस को रास्ता दिलाने के लिए आम लोगों को खुद मशक्कत करनी पड़ी।

समय पर सूचना और तैयारी को लेकर बड़ा सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने जिला प्रशासन और यातायात विभाग के बीच आपसी समन्वय को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहरवासियों का कहना है कि केलो डैम के गेट खोले जाने की स्थिति पहले से अनुमानित थी, ऐसे में चक्रपथ के डूबने के बाद यातायात पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को देखते हुए पहले से वैकल्पिक यातायात व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
यदि डैम के गेट खोलने की सूचना यातायात विभाग को समय पर मिल गई थी, तो डायवर्जन प्लान, अतिरिक्त बल और संवेदनशील चौक-चौराहों पर ट्रैफिक व्यवस्था पहले से क्यों नहीं की गई? वहीं, यदि यातायात विभाग को समय पर सूचना ही नहीं मिली, तो यह प्रशासनिक समन्वय की गंभीर कमी का मामला बनता है।
12 से 24 घंटे पहले क्यों नहीं हुई तैयारी?
चक्रपथ के डूबने के बाद शहर की यातायात व्यवस्था प्रभावित होना कोई अप्रत्याशित स्थिति नहीं है। इसके बावजूद समय रहते ट्रैफिक डायवर्जन और वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था नहीं किए जाने से लोगों को घंटों परेशानी झेलनी पड़ी।
शहरवासियों का सवाल है कि जब भारी बारिश और डैम में बढ़ते जलस्तर की जानकारी पहले से थी, तो कम से कम 12 से 24 घंटे पहले संभावित यातायात संकट को ध्यान में रखते हुए तैयारी क्यों नहीं की गई?
जाम लगने के बाद मोर्चे पर उतरा यातायात अमला
जानकारी के अनुसार, ट्रैफिक डीएसपी स्वयं करीब 11 बजे रेलवे फाटक के पास पूरी टीम और आरपीएफ के साथ यातायात व्यवस्था संभालने में जुटे नजर आए। यातायात अमले ने जाम को नियंत्रित करने के लिए काफी मशक्कत की, लेकिन तब तक स्थिति गंभीर हो चुकी थी।
यही वजह है कि अब शहर में यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि यातायात अमला बाद में पूरी ताकत के साथ व्यवस्था संभाल सकता है, तो यही तैयारी जाम लगने से पहले क्यों नहीं की गई?
पहले से दबाव वाले मार्ग, फिर अचानक बढ़ा ट्रैफिक
रायगढ़ शहर में काशीराम चौक, चक्रधर नगर चौक, मिनीमाता चौक, कलेक्ट्रेट मार्ग और शनि मंदिर क्षेत्र जैसे प्रमुख मार्ग सामान्य दिनों में भी यातायात के दबाव से जूझते हैं। ऐसे में चक्रपथ जैसे महत्वपूर्ण मार्ग के बंद होने पर इन सड़कों पर अचानक कई गुना यातायात बढ़ना स्वाभाविक है।
ऐसी परिस्थितियों के लिए पहले से ट्रैफिक डायवर्जन, अतिरिक्त जवानों की तैनाती और वैकल्पिक मार्गों की स्पष्ट व्यवस्था जरूरी है। लेकिन आज की स्थिति ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि आपदा या जलभराव की स्थिति में शहर की यातायात व्यवस्था के लिए प्रशासन की पूर्व तैयारी कितनी प्रभावी है।
जनता चाहती है जवाब
आज की घटना ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि शहर में बारिश, डैम के गेट खुलने और जलस्तर बढ़ने जैसी परिस्थितियों के लिए प्रशासनिक विभागों के बीच कितना प्रभावी समन्वय है।
शहरवासियों का कहना है कि समय पर सूचना, पूर्व नियोजित डायवर्जन और पर्याप्त यातायात बल की तैनाती होती तो स्कूली बच्चों, मरीजों, एंबुलेंस और आम राहगीरों को घंटों जाम में फंसने से बचाया जा सकता था।
अब जरूरत सिर्फ जाम खुलने की नहीं, बल्कि इस पूरे घटनाक्रम की समीक्षा कर यह तय करने की है कि अगली बार केलो डैम के गेट खुलने से पहले रायगढ़ की यातायात व्यवस्था को कैसे तैयार रखा जाए, ताकि चक्रपथ डूबने की स्थिति शहर के लिए यातायात संकट में न बदल जाए।
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