केजीएमयू में धर्मांतरण से जुड़े मामले में एसटीएफ की रिपोर्ट के आधार पर 13 डॉक्टरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है. छह नवंबर को होने वाली कार्यपरिषद की बैठक में जांच कमेटी के गठन पर फैसला हो सकता है.
लखनऊ. किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में धर्मांतरण से जुड़े मामले में 13 डॉक्टरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है. विशेष कार्यबल (एसटीएफ) की सात पन्नों की रिपोर्ट में इन डॉक्टरों की कथित भूमिका का उल्लेख किया गया है. मामले में एक हिंदू डॉक्टर पर भी शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने का आरोप है.
छह नवंबर को विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद की आपात बैठक बुलाई गई है. इसमें आरोपी डॉक्टरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कमेटी गठित करने के प्रस्ताव पर निर्णय लिया जा सकता है. जांच पूरी होने के बाद संबंधित डॉक्टरों को विभागाध्यक्ष और अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियों से भी हटाया जा सकता है.
नोटिस देकर मांगा जाएगा जवाब
केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह के मुताबिक, विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्रवाई की रूपरेखा तैयार कर ली है. कार्यपरिषद से कमेटी गठन की मंजूरी मिलने के बाद संबंधित डॉक्टरों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा जाएगा.
प्रस्तावित कमेटी को मामले के सभी पहलुओं की जांच करके एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी. इसके बाद जांच रिपोर्ट शासन और उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी. जांच प्रक्रिया के दौरान एसटीएफ से भी आवश्यक जानकारियां जुटाई जाएंगी.
इस मामले का असर उन डॉक्टरों की भविष्य की प्रशासनिक जिम्मेदारियों पर भी पड़ सकता है, जिन्हें सेवानिवृत्ति के बाद विश्वविद्यालय में पद दिए जाने की संभावना थी.
डेंटल विभाग पर भी आरोप
एसटीएफ की रिपोर्ट में केजीएमयू के डेंटल विभाग में भी धर्मांतरण से संबंधित गतिविधियों की आशंका जताई गई है. आरोप है कि विभाग के एक डॉक्टर हिंदू छात्रों को परीक्षा में सफल कराने, रेजिडेंट डॉक्टर के तौर पर नौकरी दिलाने और आगे स्थायी नियुक्ति का भरोसा देकर प्रभावित करने की कोशिश करते थे.
संबंधित डॉक्टर पर कट्टरपंथी विचारधारा का प्रचार करने के आरोप भी लगाए गए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, विरोध करने वाली छात्राओं को परीक्षा में असफल करने और उनका करियर खराब करने की धमकी दी जाती थी.
इन कथित धमकियों के कारण छात्राएं मानसिक दबाव में रहती थीं और शिकायत करने से बचती थीं. एसटीएफ ने अपनी रिपोर्ट में इन आरोपों के साथ संबंधित डॉक्टरों की भूमिका का भी विवरण दिया है.

