फीचर स्टोरी। कृषि, किसान, केंचुआ और कमाई की ये कहानी, जिसने महिलाओं की तकदीर बदलकर रख दी. महिलाओं ने केंचुआ पालन में लाखों की कमाई की. साथ ही अपने जीवन में खुशियां लेकर आई. केंचुआ मिट्टी को ‘सोना’ बनाते रहे और महिलाएं खाद को नोटों में बदलती रहीं. महिलाओं ने मेहनत कर 5.42 लाख रुपये का मुनाफा कमाया. महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की ओर एक कदम बढ़ाया है, जिससे आज परिवार में खुशहाली के सागर भरे हैं.

केंचुआ पालन से जीवन स्तर सुधर रहा

दरअसल, नवगठित जिला खैरागढ़-छुईखदान-गंडई के विकासखण्ड के ग्राम विचारपुर की महिलाओं का सामुदायिक बाड़ी और केंचुआ पालन से जीवन स्तर सुधर रहा है. आज समूह की महिलाओं ने गांव में रहते हुए अपने आपको आत्मनिर्भर बनाया है3. सामुदायिक बाड़ी और केंचुआ पालन क्षेत्र में हाथ आजमाते हुए इन महिलाओं ने सफलता की सीढ़ियां चढ़ना शुरू किया. आर्थिक आत्मनिर्भर बनने से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ हुई है.

कम ब्याज पर राशि देकर जरूरतमंदों की मदद

ग्राम पंचायत विचारपुर विकासखण्ड खैरागढ़ के जय मां दुर्गा स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने रोजमर्रा के काम के साथ-साथ समूह का नियमित रूप से संचालन करते हुए अपने सभी दस्तावेजों का संधारण किया. नियमित बैठक भी आयोजित की गई. शुरूआती दिनों में छोटी-छोटी बचत करके जो पैसा जमा किया उस राशि को कम ब्याज पर जरूरतमंदों को देकर उनकी मदद की.

धीरे-धीरे आर्थिक रुप से हुए मजबूत

इससे वे गांव में लोकप्रिय होने लगीं और धीरे-धीरे आर्थिक रुप से मजबूत होने लगी. उनके पास नियमित बचत के जरिये कुछ रकम जमा हुई तो उन्होंने केंचुआ पालन व्यवसाय करने का निर्णय लिया.

2000 लगाकर 15 हजार की कमाई

गांव के गोठान परिसर में समूह के लिए एक केंचुआ शेड का निर्माण किया गया. केंचुआ पालन व्यवसाय के साथ साथ जिमीकांदा, हल्दी, अदरक, पोषण वाटिका, वर्मी वाश निर्माण, रागी, मिलेट से पौष्टिक आहार बनाने जैसे विभिन्न गतिविधियों की जा रही है. समूह की मासिक आय लगभग 15,000 रू. है. वहीं मासिक व्यय राशि मात्र 2000 है.

समूह की कुल आय 5.42 लाख रूपये हो चुकी

सदस्यों ने बताया कि अब तक समूह की कुल आय 5.42 लाख रूपये हो चुकी है. ग्राम की नवदीप ग्राम संगठन के अंतर्गत महिला समूह का संकल्प है कि विभागीय शासकीय योजनाओं के सहयोग लेकर आय मूलक गतिविधियों जैसे केंचुआ पालन, वर्मीकम्पोस्ट, कड़कनाथ और देशी मुर्गीपालन, जिमीकंद, हल्दी, अदरक का पोषण वाटिका, वर्मी वाश निर्माण, रागी मिलेट से पौष्टिक आहार बनाने जैसे विभिन्न गतिविधियों से जुड़कर समूह का विस्तार के साथ ही आर्थिक एवं सामाजिक उन्नति की ओर बढ़ने संकल्पित है.

केंचुआ पालन के लाभ

केंचुआ खाद के उपयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है

इससे मिट्टी में लाभदायक सूक्ष्म जीवों की संख्या में बढ़ोत्तरी होती है

इसके उपयोग से उगाई गई उत्पादों की गुणवत्ता अच्छी होती है

सब्जियों, फूलों, फलों एवं फसलों के उत्पादन में वृद्धि होती है

मिट्टी में उपस्थित लाभदायक जीवाणुओं में वृद्धि तथा सुधार होता है

मिट्टी में वायु संचार एवं जल धारण की क्षमता बढ़ती है

फसलों में खरपतवार कम उगते हैं

फसलों में कीड़े, बीमारी एवं रोग कम लगते हैं

केंचुआ, पालन के लिए जरुरी चीजें

केंचुए को पालने के लिए लकड़ी के कंटेनर की जरुरत पड़ती है.

कंटेनर बनाने के लिए नया या पुराना किसी भी लकड़ी का प्रयोग कर सकते हैं.

केंचुए को कंटेनर में जीवित रखने के लिए लकड़ी के बॉक्स के निचे पानी निकालने के लिए छेद जरूर बनाएं.

इससे केचुए स्वस्थ भी रहते हैं तथा खाद अच्छी तरह से बनते हैं.

केंचुए को खाने के लिए सभी प्रकार का जैविक कचरा कंटेनर में डालना चाहिए.

केंचुआ पालन से खाद बनाने के लिए पौधों की पत्तियाँ, किचन से बचे सब्जियों के छिलके, गोबर, पराली, फसलों के टुकड़े इत्यादि का इस्तेमाल किया जाता है.

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