किशनगंज। जिले में अवैध खनन माफियाओं के खिलाफ प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। जिले में लगातार हो रहे अवैध बालू उत्खनन की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए खनन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने मंगलवार को एक बड़ी छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान अवैध गतिविधियों के पुख्ता सबूत मिलने के बाद सदर थाना में 10 से 12 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है।

​गुप्त सूचना पर नदी में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

​यह पूरी कार्रवाई खान निरीक्षक सुनील कुमार के आधिकारिक बयान पर आधारित है। छापेमारी का मुख्य केंद्र सदर थाना क्षेत्र के बेलवा टूकामारी और टेंगरमारी पुल के समीप का नदी क्षेत्र रहा। अधिकारियों के मुताबिक, उन्हें पिछले काफी समय से इन इलाकों में अवैध रूप से बालू निकाले जाने की गोपनीय सूचनाएं मिल रही थीं। सूचना की सत्यता की जांच के लिए जब टीम मौके पर पहुंची, तो वहां खनन के स्पष्ट साक्ष्य पाए गए।

​थर्मोकोल की नावों का जाल और प्रशासनिक कार्रवाई

​कार्रवाई के दौरान एक दिलचस्प और चिंताजनक बात सामने आई। बालू माफिया नदी से अवैध रूप से बालू निकालने और उसे ढोने के लिए थर्मोकोल से बनी विशेष नावों का उपयोग कर रहे थे। छापेमारी दल को देखते ही खनन में लगे मजदूर और माफिया मौके का फायदा उठाकर फरार हो गए। पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में थर्मोकोल की नावें बरामद कीं, जिन्हें प्रशासन के निर्देशानुसार तत्काल प्रभाव से जब्त कर नष्ट कर दिया गया ताकि उनका दोबारा उपयोग न हो सके।

​पर्यावरण और राजस्व को पहुंचाई जा रही थी क्षति

​जिला प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अवैध खनन न केवल सरकार के राजस्व की चोरी है, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी एक बड़ा खतरा है। नदी के तल से अनियंत्रित रूप से बालू निकालने से जल स्तर और पुलों की मजबूती पर बुरा प्रभाव पड़ता है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों की लूट किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

​दोषियों की तलाश और भविष्य की रणनीति

​फिलहाल, पुलिस दर्ज FIR के आधार पर फरार आरोपियों की पहचान करने में जुटी है। स्थानीय मुखबिरों और साक्ष्यों की मदद से माफियाओं के ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। जिला प्रशासन ने यह भी साफ कर दिया है कि यह अभियान केवल एक दिन की कार्रवाई नहीं है, बल्कि भविष्य में भी अवैध खनन स्थलों पर इसी तरह की औचक छापेमारी जारी रहेगी।