Kota Dog Attack: राजस्थान के कोटा में एक आवारा कुत्ते ने 5 साल की बच्ची पर हमला कर दिया। छावनी इलाके की बंगाली कॉलोनी में कुत्ते ने बच्ची को सड़क पर गिराकर घसीटा और उसके सिर, कलाई और पीठ पर बुरी तरह नोंच डाला। बच्ची की चीख सुनकर आसपास के लोग और एक महिला मौके पर पहुंचे और कुत्ते को भगाकर उसकी जान बचाई। पूरी घटना पास लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई।

बच्ची की चीख सुनकर दौड़े लोग
घटना स्वामी विवेकानंद स्कूल के पीछे स्थित बंगाली कॉलोनी की बताई जा रही है। बच्ची नमरा कॉलोनी की सड़क पर थी, तभी आवारा कुत्ते ने उस पर हमला कर दिया। CCTV फुटेज में कुत्ता बच्ची पर झपटता और उसे जमीन पर गिराकर घसीटता दिखाई दे रहा है। बच्ची के चीखने की आवाज सुनकर आसपास के लोग दौड़कर पहुंचे। लोगों ने कुत्ते को भगाया और बच्ची को उसके चंगुल से बाहर निकाला।
सिर, कलाई और पीठ पर गहरे घाव
कुत्ते के हमले में बच्ची के सिर, कलाई और पीठ पर गंभीर चोटें आई हैं। बच्ची को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। इस घटना के बाद इलाके के लोगों में आवारा कुत्तों को लेकर नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इसी इलाके में इससे पहले भी एक सफाईकर्मी खेमराज पर आवारा कुत्ते ने हमला किया था। कुत्ते ने उनके पैर को बुरी तरह नोंच दिया था। लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद लोग नगर निगम से आक्रामक और आवारा कुत्तों पर प्रभावी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
KMC बना रहा 600-700 कुत्तों की क्षमता वाला शेल्टर
कोटा नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक, शहर में आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए कई स्तर पर काम किया जा रहा है। इनमें आवारा कुत्तों के लिए अलग आश्रय स्थल बनाना भी शामिल है। नगर निगम आयुक्त ओपी मेहरा के अनुसार, सड़कों से पकड़े जाने वाले आक्रामक कुत्तों के लिए फिलहाल कोई स्थायी आश्रय उपलब्ध नहीं है। इसी को देखते हुए बांदा धर्मपुरा क्षेत्र में 600 से 700 कुत्तों की क्षमता वाला शेल्टर बनाया जा रहा है।
नसबंदी के बाद कुत्तों को उसी इलाके में छोड़ा जाता है
नगर निगम के अनुसार, सामान्य आवारा कुत्तों को पकड़कर Animal Birth Control यानी ABC प्रक्रिया के तहत नसबंदी और जरूरी प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसके बाद उन्हें उसी इलाके में वापस छोड़ा जाता है। हालांकि, आक्रामक कुत्तों को लेकर अलग व्यवस्था की जरूरत है। बच्ची पर हुए हमले के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है कि शहर में ऐसे कुत्तों की पहचान और उनके सुरक्षित प्रबंधन की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
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