Kota JK Lon Hospital: राजस्थान के कोटा स्थित जेके लोन अस्पताल में 26 वर्षीय प्रसूता शबनम की मौत के बाद एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठे हैं। बारां जिले के छबड़ा निवासी शबनम को 23 अक्टूबर की रात गंभीर हालत में कोटा रेफर किया गया था। अस्पताल पहुंचने तक वह कोमा में थी और उसे दौरे पड़ रहे थे।

डॉक्टरों ने सिजेरियन डिलीवरी के जरिए नवजात को बचा लिया, लेकिन इलाज के दौरान शनिवार देर रात शबनम की मौत हो गई। कोटा में नौ दिन के भीतर प्रसूता की मौत का यह तीसरा मामला है। घटना के बाद राज्य सरकार ने जांच शुरू करवाई है, वहीं कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर सवाल उठाए हैं।
कोमा की हालत में अस्पताल पहुंची थी शबनम
जेके लोन अस्पताल की गायनेकोलॉजी विभागाध्यक्ष और अस्पताल अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा के अनुसार, शबनम को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। वह करीब 24 घंटे तक अस्पताल में भर्ती रही। डॉक्टरों ने परिजनों को उसकी स्थिति की जानकारी देने के बाद सिजेरियन ऑपरेशन किया, जिससे नवजात की जान बचाई जा सकी। डॉक्टरों के मुताबिक, इलाज के दौरान शबनम का ब्लड प्रेशर कम हो गया था। उसे वेंटिलेटर सपोर्ट भी दिया गया, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। आखिरकार शनिवार देर रात उसने दम तोड़ दिया।
परिजनों ने ऑपरेशन में देरी का लगाया आरोप
शबनम के भाई सरफराज ने बारां जिला अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि 22 अक्टूबर को शबनम को सिजेरियन डिलीवरी के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अगले दिन ऑपरेशन करने की बात कही गई थी, लेकिन उनके अनुसार 12 घंटे बीतने के बाद भी सिजेरियन नहीं किया गया।
सरफराज का आरोप है कि 23 अक्टूबर को शाम करीब सात बजे शबनम को ड्रिप चढ़ाई गई, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी और उसे दौरे पड़ने लगे। बाद में गंभीर हालत में उसे कोटा रेफर किया गया। ये आरोप परिजनों की ओर से लगाए गए हैं। इलाज में देरी या किसी चिकित्सकीय लापरवाही की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
स्वास्थ्य विभाग ने बनाई जांच कमेटी
मामले के सामने आने के बाद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू करवाई है। विभाग के संयुक्त निदेशक, कोटा जोन डॉ. जगदीश सोनी के मुताबिक, बारां जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी (पीएमओ) ने जांच कमेटी गठित की है।
कमेटी में गायनेकोलॉजी विभाग की डॉ. रिंकेश मीणा, एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. गरिमा गोयल और सीनियर स्पेशलिस्ट डॉ. हरिओम मीणा को शामिल किया गया है। जांच में इलाज के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया और सामने आए घटनाक्रम की पड़ताल की जाएगी।
कांग्रेस ने सरकार को घेरा
प्रसूता की मौत के बाद राजस्थान की भाजपा सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सारिका सिंह चौहान ने सोशल मीडिया के जरिए सरकार पर हमला बोला है।
कोटा में प्रसूताओं की मौत का मामला इससे पहले भी चर्चा में रहा है। मई में यहां चार प्रसूताओं और एक गर्भवती की मौत के मामले सामने आए थे। इसके बाद अक्टूबर में भी ऐसी घटनाएं सामने आईं। 16 अक्टूबर को रेशमा और 19 अक्टूबर को रोशन बैरवा की मौत के बाद अब शबनम की मौत ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पिछली जांच में डॉक्टरों की लापरवाही नहीं मानी गई थी
कोटा में पहले हुई प्रसूताओं की मौत के मामलों की जांच मेडिकल कॉलेज स्तर के साथ राज्य सरकार और एसएमएस मेडिकल कॉलेज की टीमों ने भी की थी। केंद्र सरकार की ओर से एम्स की टीम ने भी जांच की थी। खबर में दी गई जानकारी के अनुसार, चारों जांच कमेटियों की रिपोर्ट में डॉक्टरों की लापरवाही नहीं मानी गई थी। मामले में निलंबित किए गए तीन डॉक्टरों को बाद में बहाल कर दिया गया था। इनमें गायनेकोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. बीएल पाटीदार, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. खुशबू मीणा और सर्जरी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नवनीत कुमार शामिल थे।
इंजेक्शन और ड्रिप के नमूनों की रिपोर्ट का इंतजार
पिछले मामलों की जांच के दौरान ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन को छोड़कर अन्य दवाओं के नमूने जांच में पास हो गए थे। वहीं, अस्पताल में इस्तेमाल किए गए इंस्ट्रूमेंट के नमूनों की रिपोर्ट का इंतजार था। प्रसूता की मौत का मामला दोबारा सामने आने के बाद 12 इंजेक्शन और ड्रिप के 14 नमूने भी लिए गए हैं। इनकी रिपोर्ट आना बाकी है। शबनम की मौत के मामले में जांच के निष्कर्ष और नमूनों की रिपोर्ट से जुड़े तथ्यों पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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