Rajasthan News: कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (NMCH) में प्रसूताओं की मौत ने पूरी राजस्थान सरकार को हिलाकर रख दिया है। अब इस मामले में अस्पताल के वार्ड में इस्तेमाल हो रही 9 दवाओं पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी गई है। अब ये दवाएं न तो बेची जा सकेंगी और न ही किसी मरीज को दी जाएंगी।

ड्रग कंट्रोलर ने साफ निर्देश दिया है कि सभी निर्माता, एजेंट और दुकानदार इन खास बैच की दवाओं को सप्लाई न करें। कोटा और बूंदी के ड्रग अफसरों ने वार्ड से दवाओं के सैंपल लिए हैं। अब इनकी लैब में कानूनी जांच होगी। जब तक सरकारी विश्लेषक की रिपोर्ट हरी झंडी नहीं देती, तब तक इन दवाओं का इस्तेमाल पूरी तरह बंद रहेगा।
डॉक्टर सस्पेंड, नर्सों पर गिरी गाज
इस पूरे मामले में सिर्फ दवाओं पर ही गाज नहीं गिरी है, बल्कि अस्पताल के स्टाफ पर भी बड़ा एक्शन हुआ है। जांच में पता चला कि इलाज के दौरान मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया। इसके बाद जनरल सर्जरी विभाग के डॉ. नवनीत कुमार को सस्पेंड कर दिया गया है। वहीं, डॉ. श्रद्धा उपाध्याय की छुट्टी कर दी गई है। ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग अधिकारी गुरजोत कौर और निमेश वर्मा को भी लापरवाही के चलते निलंबित कर जयपुर भेज दिया गया है।
बड़े डॉक्टरों को नोटिस, ओटी मैनेजमेंट पर सवाल
प्रसूति विभाग के यूनिट हेड डॉ. बीएल पटीदार और डॉ. नेहा सीहरा को भी कारण बताओ नोटिस थमाया गया है। उनसे पूछा गया है कि ऑपरेशन के बाद मरीजों की देखभाल में कमी क्यों रही? सरकार ने अस्पताल प्रशासन को आदेश दिया है कि वे अपने ऑपरेशन थिएटर (OT), एनेस्थीसिया सिस्टम और दवा देने के तरीके की दोबारा जांच करें। फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप का माहौल है।
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