Kota Pregnant Women Case: कोटा मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत और किडनी फेल्योर के बहुचर्चित मामले में तीन निलंबित डॉक्टरों को बहाल कर दिया गया है। मामले की जांच के लिए गठित कोटा, जयपुर, जोधपुर और दिल्ली की चार उच्चस्तरीय कमेटियों ने अपनी जांच में डॉक्टरों की व्यक्तिगत चिकित्सकीय लापरवाही नहीं पाई। रिपोर्ट आने के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग ने शुक्रवार को तीनों डॉक्टरों का निलंबन रद्द कर उन्हें फिर कोटा मेडिकल कॉलेज में पदस्थापित कर दिया।

9 मई को तीन डॉक्टर हुए थे निलंबित
मई 2026 में कोटा मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में भर्ती प्रसूताओं में किडनी फेल्योर के गंभीर मामले सामने आए थे। इसके बाद जेके लोन अस्पताल में भी इसी तरह के मामले सामने आए। कुछ प्रसूताओं की मौत के बाद मामला काफी चर्चा में आ गया था।
इसके बाद राज्य सरकार ने 9 मई 2026 को कोटा मेडिकल कॉलेज के तीन डॉक्टरों को निलंबित किया था। इनमें गायनी विभाग के प्रोफेसर डॉ. बीएल पाटीदार, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. खुशबू मीणा और सर्जरी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नवनीत कुमार शामिल थे।
चार कमेटियों ने अलग-अलग स्तर पर की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए अलग-अलग स्तर पर जांच कराई गई। सबसे पहले कोटा मेडिकल कॉलेज ने अपनी जांच कमेटी बनाई। इसके बाद मेडिकल कॉलेज जयपुर से भी कमेटी भेजी गई।
मामला ज्यादा चर्चा में आने के बाद एम्स की टीम कोटा पहुंची। इस टीम में दिल्ली के साथ जोधपुर और अन्य एम्स के डॉक्टर शामिल थे। इसके अलावा नेशनल हेल्थ मिशन ने भी एडिशनल डायरेक्टर की अगुवाई में जांच कमेटी गठित की।
दवाओं से लेकर इलाज की प्रक्रिया तक खंगाली गई
जांच कमेटियों ने इलाज के दौरान इस्तेमाल की गई दवाओं, उपचार की प्रक्रिया, संक्रमण के संभावित स्रोत और मरीजों की केस हिस्ट्री की तकनीकी पड़ताल की।
रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टरों ने इलाज तय प्रोटोकॉल के तहत किया था। चारों कमेटियों की जांच में तीनों डॉक्टरों की व्यक्तिगत चिकित्सकीय गलती सामने नहीं आई। इसी आधार पर उन्हें क्लीनचिट दी गई।
शुक्रवार को जारी हुआ बहाली का आदेश
चिकित्सा शिक्षा विभाग की संयुक्त सचिव डॉ. ज्योति चौहान ने शुक्रवार को तीनों डॉक्टरों की बहाली के आदेश जारी किए। निलंबन रद्द करने के साथ तीनों को दोबारा कोटा मेडिकल कॉलेज में ही पदस्थापित किया गया है।
जेके लोन अस्पताल की अधीक्षक और मेडिकल कॉलेज में गायनी विभाग की अध्यक्ष डॉ. निर्मला शर्मा के मुताबिक तीनों डॉक्टरों की बहाली के आदेश जारी हो चुके हैं। इनमें दो डॉक्टर गायनी विभाग और एक सर्जरी विभाग से हैं। डॉक्टर शनिवार से ड्यूटी ज्वाइन करेंगे।
कोटा के बाद दूसरे शहरों में भी सामने आए मामले
कोटा में शुरुआत में पांच प्रसूताओं में यह समस्या सामने आई थी। इसका खुलासा 5 मई 2026 को हुआ था। इसके बाद कुल 12 महिलाओं को संक्रमित माना गया। इनमें चार प्रसूता और एक गर्भवती शामिल थी।
दिए गए विवरण के अनुसार पायल, ज्योति, पिंकी महावर, प्रिया और शिरीन की मौत हो चुकी है। वहीं रागिनी, धन्नी, सुशीला, चंद्रकला, किरण, पिंकी और आरती को इलाज के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया। कोटा की घटना के बाद प्रदेश के दूसरे हिस्सों से भी प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने और मौत से जुड़े मामले सामने आए।
पीड़ित परिवार ने रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की
इस पूरे घटनाक्रम में रागिनी की तबीयत भी बिगड़ी थी। वह फिलहाल डायलिसिस पर हैं और उनकी किडनी काम नहीं कर रही है। परिवार के मुताबिक सरकार ने किडनी ट्रांसप्लांट का आश्वासन दिया था। रागिनी के पति लोकेश ने जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका सवाल है कि अगर डॉक्टरों को क्लीनचिट मिली है तो पूरा घटनाक्रम क्यों और कैसे हुआ, इसके कारण क्या रहे, यह भी सामने आना चाहिए। लोकेश का कहना है कि परिवार को अब तक कोई सहायता नहीं मिली है और सिर्फ किडनी ट्रांसप्लांट का आश्वासन दिया गया है। उनके मुताबिक ट्रांसप्लांट के लिए परिवार से ही किडनी डोनेट करने को कहा जा रहा है।
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