भुवनेश्वर। आंध्र प्रदेश द्वारा विवादित सीमावर्ती क्षेत्र कोटिया में पंचायत चुनाव कराने की अधिसूचना जारी करने के बाद ओडिशा की राजनीति गरमा गई है। ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने राज्य सरकार पर प्रशासनिक अक्षमता और दूरदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है। उन्होंने मांग की है कि इस दशकों पुराने विवाद को केवल सुप्रीम कोर्ट में लंबित रखने के बजाय तत्काल राजनीतिक और कूटनीतिक बातचीत के जरिए हल किया जाना चाहिए।

कोटिया ओडिशा का एक अभिन्न हिस्सा और उड़िया पहचान तथा स्वाभिमान का प्रतीक है। भक्त चरण दास ने कहा कि चूंकि केंद्र, ओडिशा और आंध्र प्रदेश (एनडीए/बीजेपी गठबंधन) में एक ही विचारधारा की सरकारें हैं, इसलिए अंतर-राज्यीय वार्ता के माध्यम से इस मुद्दे का स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए।

कांग्रेस नेता ने राज्य सरकार के प्रयासों की प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हुए कहा कि विशेष समितियों के गठन, अधिकारी-स्तरीय बैठकों और रिपोर्टों की तैयारी से कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है। ओडिशा सरकार आंध्र प्रदेश के प्रति बेहद ढुलमुल और कमजोर रवैया अपना रही है। राज्य के क्षेत्रीय हितों और सीमाओं की रक्षा के लिए मजबूत और कड़े प्रशासनिक कदम उठाए जाने की जरूरत है।

दूसरी ओर, ओडिशा के राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी ने राज्य के एडवोकेट जनरल पीतांबर आचार्य के साथ बैठक कर विवाद के कानूनी पहलुओं की समीक्षा की है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में ओडिशा की प्रशासनिक उपस्थिति को मजबूत किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में जारी कानूनी कार्यवाही को तेज करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। क्षेत्र में शांति, स्थिरता और जनविश्वास बनाए रखते हुए राज्य के अधिकारों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिकता है।

यह अंतर-राज्यीय सीमा विवाद कई दशकों से लंबित है। 2006 में ओडिशा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन याचिका खारिज हो गई थी। 16 साल के अंतराल के बाद, 2022 में ओडिशा सरकार ने शीर्ष अदालत में फिर से नया मामला दायर किया, जो वर्तमान में लंबित है।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m