विनोद सैनी, हिसार। हरियाणा की राजनीति में कुछ व्यक्तित्व ऐसे हैं जिनकी पहचान किसी एक चुनाव, पद या राजनीतिक दौर तक सीमित नहीं है। उनका सार्वजनिक जीवन समय के साथ और व्यापक होता गया है। कुमारी सैलजा भी ऐसा ही एक राजनीतिक नाम हैं, जिनकी पहचान छोटे से गांव प्रभुवाला से होते हुए हरियाणा से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक बनी है। 24 सितंबर को उनके जन्मदिन के अवसर पर उनके तीन दशक से अधिक लंबे राजनीतिक सफर, सामाजिक सरोकारों और स्वर्गीय चौधरी दलबीर सिंह की विरासत को याद करना स्वाभाविक है।

कुमारी सैलजा का जन्म 24 सितंबर 1962 को हुआ। वे वर्तमान में सिरसा लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की राष्ट्रीय महासचिव के साथ-साथ उत्तराखंड की प्रभारी भी हैं, और कांग्रेस कार्यसमिति की सदस्य भी हैं।

सिद्धांतवादी पिता से मिली विरासत, बीजेपी की जातिवादी राजनीति की काट

सैलजा के राजनीतिक जीवन की पृष्ठभूमि में उनके पिता स्वर्गीय चौधरी दलबीर सिंह का व्यक्तित्व और विरासत रही है। दलबीर सिंह लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे और केंद्र सरकार में मंत्री के रूप में विभिन्न जिम्मेदारियां संभालीं। लेकिन सैलजा की पहचान केवल इस विरासत तक सीमित नहीं रही — महिला कांग्रेस से शुरू हुए सफर में उन्होंने संगठन, संसद और सरकार में काम करते हुए अपनी स्वतंत्र पहचान बनाई, आगे चलकर लोकसभा सदस्य और केंद्रीय मंत्री बनीं।

आज के दौर में जब राजनीति को लेकर आम धारणा नकारात्मक होती जा रही है, सिद्धांतों पर टिके रहने वाले नेता कम ही बचे हैं। 2024 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण में अनदेखी के बावजूद सैलजा ने चुप्पी को उचित समझा, लेकिन जब बीजेपी ने इसे अपने पाले में शामिल होने की अटकल के रूप में भुनाने की कोशिश की, तो उन्होंने तुरंत स्पष्ट किया — “मेरी रगों में कांग्रेस का खून है, मेरा शरीर कांग्रेस के तिरंगे में लिपटकर जाएगा, जैसे मेरे पिता का गया था।” इस भावुक बयान ने लोगों को गहरे छुआ। छत्तीस बिरादरी में लोकप्रिय कुमारी सैलजा को हरियाणा में बीजेपी की जातिगत राजनीति की सबसे कारगर काट माना जाता है, और आम जनता उन्हें भावी मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहती है।

संसद से केंद्र सरकार तक जिम्मेदारियां

छ बार की सांसद सैलजा का अनुभव केवल संगठनात्मक राजनीति तक सीमित नहीं रहा। केंद्र सरकार में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने वंचित वर्गों और सामाजिक न्याय से जुड़े विषयों पर कई पहल कीं। हरियाणा से केंद्र सरकार और राष्ट्रीय संगठन तक काम करने का यह अनुभव उनके राजनीतिक जीवन की बड़ी पूंजी है।

सादगी और संवाद की राजनीति

लंबे सार्वजनिक जीवन के बावजूद सैलजा की कार्यशैली में संवाद और संगठन को प्राथमिकता देना साफ झलकता है। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने सदस्यता अभियान और महिला भागीदारी पर जोर दिया। 2022 की ‘हरियाणा संदेश यात्रा’ के दौरान उन्होंने महिलाओं से राजनीति और सार्वजनिक जीवन में आगे आने का आह्वान किया था।

राष्ट्रीय संगठन और गांधी परिवार से जुड़ाव

एआईसीसी की राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड प्रभारी के रूप में सैलजा आज भी संगठन का काम संभाल रही हैं। कांग्रेस कार्यसमिति सदस्यता सहित कई राष्ट्रीय निर्णय-प्रक्रियाओं से उनका जुड़ाव रहता है। इस लंबे अनुभव को उनके समर्थक कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के साथ उनके गहरे विश्वास और जुड़ाव के संकेत के रूप में देखते हैं।

चौधरी दलबीर सिंह के आदर्शों को आगे बढ़ाने का प्रयास

चौधरी दलबीर सिंह ने जिस दौर में सार्वजनिक जीवन शुरू किया, वह आज से बिल्कुल अलग था — तब जनसंपर्क और ग्रामीण समाज से सीधा संवाद राजनीति की बुनियाद थी। सैलजा ने उसी पारिवारिक परंपरा को आधुनिक राष्ट्रीय राजनीति से जोड़ा है। उनके राजनीतिक जीवन में सामाजिक न्याय, महिला भागीदारी, कमजोर वर्गों के अधिकार, और किसानों, युवाओं, व्यापारियों व कर्मचारियों के मुद्दे लगातार प्रमुखता पाते रहे हैं — यही कारण है कि जनता उन्हें पिता की राजनीतिक विरासत की स्वाभाविक उत्तराधिकारी मानती है।

24 सितंबर — विरासत, अनुभव और उम्मीद का दिन

कुमारी सैलजा का जन्मदिन समर्थकों के लिए केवल शुभकामनाओं का अवसर नहीं, बल्कि उस राजनीतिक यात्रा को याद करने का मौका है जिसमें एक वरिष्ठ राजनीतिक परिवार से निकलीं महिला ने संसद, केंद्र सरकार, प्रदेश कांग्रेस और राष्ट्रीय संगठन में स्वयं अपनी भूमिका गढ़ी। आज जब हरियाणा की राजनीति में नए समीकरण बन रहे हैं, तब उनका संसदीय अनुभव, केंद्रीय मंत्री और प्रदेश संगठन नेतृत्व का अनुभव तथा राष्ट्रीय कांग्रेस में मौजूदा जिम्मेदारी — यह सब उन्हें प्रदेश की राजनीति में बड़ी भूमिका का स्वाभाविक दावेदार बनाता है। मुख्यमंत्री पद को लेकर अंतिम निर्णय कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व करेगा, लेकिन हरियाणा की एक बड़ी आबादी कुमारी सैलजा को राज्य का अगला मुख्यमंत्री देखना चाहती है।