CCB-4 Cheetah Rajasthan: मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से निकलकर एक और अफ्रीकन चीता राजस्थान पहुंच गया है। करीब ढाई से तीन साल का नर चीता CCB-4 शुक्रवार रात बारां जिले के जंगलों में दाखिल हुआ।

मध्य प्रदेश के कुरकुटा गांव से राजस्थान के कुरकुटी गांव की सीमा पार करने के बाद वह दुआ, सिलोरी और खुशियारा होते हुए केलवाड़ा क्षेत्र के अंजरोंडा वन क्षेत्र तक पहुंचा। पहले ही दिन उसने करीब 16 किलोमीटर का सफर तय किया। फिलहाल कूनो नेशनल पार्क और राजस्थान वन विभाग की टीमें उसकी लगातार निगरानी कर रही हैं।

अंजरोंडा वन क्षेत्र में मिली लोकेशन, टीमें तैनात

उप वन संरक्षक विवेकानंद माणिकराव के मुताबिक, नर चीता CCB-4 ने शुक्रवार रात बारां जिले के जंगल में प्रवेश किया। उसकी मौजूदा लोकेशन केलवाड़ा क्षेत्र के अंजरोंडा वन क्षेत्र में है। कूनो नेशनल पार्क की ट्रैकिंग टीम के साथ केलवाड़ा रेंज के वनकर्मी भी मौके पर निगरानी कर रहे हैं।

केलवाड़ा रेंज के रेंजर देवराज सुमन ने बताया कि चीते की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। वन विभाग की टीम कूनो की ट्रैकिंग टीम के साथ मिलकर उसकी लोकेशन की जानकारी जुटा रही है।

बारां के जंगलों में पहले भी रह चुके हैं अफ्रीकन चीते

बारां जिले के जंगलों में अफ्रीकन चीतों की आवाजाही पहले भी होती रही है। मादा चीता आशा के शावक KP-2 और KP-3 लंबे समय तक इस इलाके में रहे थे। वहीं मादा चीता वीरा अपने शावक KPV-2 के साथ भी बारां के जंगलों में काफी समय तक रही थी। वीरा सितंबर महीने के अंत में करीब 27 दिन बिताने के बाद वापस लौट गई थी। इससे पहले भी वह लगभग दो साल पहले शाहाबाद के जंगलों तक पहुंची थी। अब CCB-4 के आने से बारां एक बार फिर चीतों की आवाजाही को लेकर चर्चा में है।

बोत्सवाना से भारत लाया गया था CCB-4

CCB-4 को प्रोजेक्ट चीता के तीसरे बैच में भारत लाया गया था। 28 फरवरी 2026 को बोत्सवाना से छह मादा और तीन नर समेत कुल नौ चीतों को भारतीय वायुसेना के विमान से ग्वालियर लाया गया था। इसके बाद हेलीकॉप्टर से सभी चीतों को श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क पहुंचाया गया। भारत आने के बाद CCB-4 को क्वारंटाइन बोमा में रखा गया। धीरे-धीरे उसे जंगल में छोड़ा गया। बाद में वह अपनी दोनों बहनों से अलग हो गया, क्योंकि वे जंगल में दूसरी दिशा में चली गई थीं।

दो अलग देशों के चीतों का बना अनोखा गठबंधन

CCB-4 सितंबर 2026 में भी चर्चा में आया था। उस समय उसने भारत में जन्मी मादा चीता निर्वा के बेटे KNG-23 के साथ गठबंधन बनाया था। आमतौर पर नर चीतों का गठबंधन सगे भाइयों के बीच देखने को मिलता है। लेकिन CCB-4 और KNG-23 अलग-अलग देशों और अलग-अलग मां से हैं। दोनों की उम्र में भी करीब छह से सात महीने का अंतर है। इसके बावजूद दोनों साथ शिकार करने, भोजन करने, एक-दूसरे को बुलाने और ग्रूमिंग करने लगे। इसे भारत और बोत्सवाना के चीतों का पहला अंतरराष्ट्रीय गठबंधन माना गया।

चीतों को क्यों पसंद आते हैं बारां के जंगल?

अफ्रीकन चीतों को घास के मैदान, सवाना, झाड़ीदार जंगल और खुले या अर्ध-शुष्क इलाके पसंद होते हैं। उन्हें शिकार का पीछा करने और तेज दौड़ लगाने के लिए खुली जगह चाहिए। इसी वजह से वे आमतौर पर घने जंगलों के बजाय कम घनी वनस्पति वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हैं, जहां उन्हें दूर तक देखने में आसानी हो।

चीतों के शिकार में छोटे और मध्यम आकार के चीतल, काला हिरण, चिंकारा, नीलगाय के बच्चे, बकरी और भेड़ शामिल हैं। बारां के जंगलों में पहले भी कई अफ्रीकन चीतों की मौजूदगी रही है। अब CCB-4 की आवाजाही ने इस क्षेत्र को फिर चर्चा में ला दिया है।

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