Kurukshetra Farmers Protest : कुरुक्षेत्र। सरकारी पोर्टल पर दर्ज गलत जानकारी ने किसानों की परेशानी इतनी बढ़ा दी कि उन्हें अपनी ही फसल मंडी में बेचने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़े। करीब 20 दिनों तक शिकायतों का समाधान नहीं होने पर मंगलवार को किसानों का सब्र टूट गया। भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में किसानों ने न्यू लघु सचिवालय स्थित नायब तहसीलदार कार्यालय पर ताला जड़कर विरोध जताया।

किसान पहले शहीद उधम सिंह चौक पर एकत्रित हुए। यहां से रोष मार्च निकालते हुए वे न्यू लघु सचिवालय पहुंचे और कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। किसानों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि पोर्टल पर गलत जानकारी दर्ज होने के कारण करीब 20 गांवों के किसान धान की बिक्री नहीं कर पा रहे हैं।

पटवारियों पर गलत रिकॉर्ड दर्ज करने का आरोप

किसानों का आरोप है कि खेतों का सही निरीक्षण करने के बजाय पटवारियों ने कार्यालय में बैठकर रिकॉर्ड दर्ज कर दिया। एक ही पटवार क्षेत्र में कई किसानों की फसल और जमीन संबंधी जानकारी गलत चढ़ा दी गई। कहीं गैर-बासमती धान को बासमती दर्शाया गया तो कहीं उपजाऊ भूमि को बंजर दर्ज कर दिया गया। इससे मंडी में धान बेचने और गेट पास बनवाने में अड़चन आ रही है।

50 से अधिक किसान प्रभावित

भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान एडवोकेट संजू नंबरदार ने बताया कि गलत रिकॉर्ड से 50 से अधिक किसान प्रभावित हैं। किसानों ने कहा कि उन्होंने एसडीएम, तहसीलदार और पटवारियों से कई बार संपर्क किया। शिकायत निवारण शिविर में भी मामला उठाया गया, लेकिन उन्हें एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय भेजने के अलावा कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

13 एकड़ जमीन के रिकॉर्ड में मिली गड़बड़ी

बीड़ अमीन निवासी किसान रविंद्र सिंह ने बताया कि उनकी 13 एकड़ जमीन के रिकॉर्ड में करीब 7 एकड़ क्षेत्र में बासमती धान दिखाया गया है। इसके अलावा लगभग 2 एकड़ भूमि को बंजर दर्ज कर दिया गया। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड में हुई इस गलती के कारण फसल बेचने की प्रक्रिया अटक गई है।

अधिकारियों के आश्वासन के बाद खोला ताला

सुबह करीब साढ़े 11 बजे किसानों ने कार्यालय पर ताला लगाकर प्रदर्शन शुरू किया। करीब दो घंटे बाद अधिकारी मौके पर पहुंचे और किसानों की शिकायतें सुनीं। एसडीएम अमन कुमार ने पोर्टल पर दर्ज गलत जानकारी को ठीक करवाने का भरोसा दिया। आश्वासन मिलने के बाद किसानों ने दोपहर करीब दो बजे कार्यालय का ताला खोल दिया।

किसानों ने चेतावनी दी कि यदि रिकॉर्ड में जल्द सुधार नहीं किया गया और फसल बिक्री की समस्या दूर नहीं हुई तो वे दोबारा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

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