कुरुक्षेत्र। खेतों में धान की फसल खड़ी है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में उसकी बिक्री भी हो चुकी है। कहीं दूसरे किसानों की जमीन के नाम पर धान बेचने का आरोप है, तो कहीं जोहड़ और मकान की छत तक पर फसल की वेरिफिकेशन (सत्यापन) कराने का दावा किया जा रहा है। कुरुक्षेत्र जिले में धान खरीद के दौरान कथित फर्जीवाड़े के इन आरोपों ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) पिहोवा ने पिहोवा, इस्माइलाबाद और कराह साहिब खरीद केंद्रों पर गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। यूनियन का दावा है कि गलत तरीके से ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर पंजीकरण और सत्यापन कराकर 32 लाख रुपये से अधिक का धान बेच दिया गया। किसान संगठन ने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

जोहड़, मकान की छत और राइस मिल पर कैसे हुई वेरिफिकेशन?

भाकियू के अनुसार, पिहोवा में सुनीता नाम की महिला किसान के मामले में जोहड़, मिल और मकान की छत पर धान की फसल दिखाकर पोर्टल पर सत्यापन कराने का आरोप है। इसके बाद मंडी में धान की बिक्री भी दर्ज हो गई। यूनियन का कहना है कि जिन किसानों की जमीन के रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया गया, उनमें से कुछ की फसल अब भी खेतों में खड़ी है।

भाकियू पिहोवा के प्रवक्ता प्रिंस वड़ैच ने आढ़तियों और राइस मिलरों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कागजों में दूसरे किसानों के नाम पर धान की बिक्री दिखाई जा रही है। उन्होंने पोर्टल पर दर्ज जमीन, फसल सत्यापन, मंडी के गेटपास, जे-फार्म और धान पहुंचाने वाली राइस मिलों के रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है।

इस्माइलाबाद में 30 लाख रुपये के धान की बिक्री पर सवाल

इस्माइलाबाद मंडी में भी कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया है। प्रिंस वड़ैच के मुताबिक, गुमथला और सारसा गांव के किसानों की जमीन का गलत इस्तेमाल कर करीब 30 लाख रुपये का धान बेचने का आरोप है।

इस मामले में प्रगट सिंह मांगना, मनीष और जसनदीप सिंह ने मार्केट कमेटी के सचिव को शिकायत दी है। शिकायत में सुच्चा, रीना देवी और अंश पर उनकी जमीन के नाम पर गलत पंजीकरण कराने का आरोप लगाया गया है।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उनकी धान की फसल अभी खेतों में खड़ी है, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में बिक्री दर्ज हो चुकी है। उन्होंने यह भी दावा किया कि दो फर्मों के नाम पर मंडी के गेटपास कटवाए गए। कुछ गेटपास की एंट्री के बीच करीब एक मिनट का अंतर होने पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है।

मार्केट कमेटी ने आढ़ती को दिया 24 घंटे का नोटिस

इस्माइलाबाद मार्केट कमेटी के सचिव अंकुर कुमार ने बताया कि किसानों की शिकायत मिलने के बाद दोनों फर्मों के यहां जाकर गेटपास के अनुसार मिलान किया गया। उनके मुताबिक, जांच के दौरान धान पूरा पाया गया। फिलहाल संबंधित धान की खरीद पर रोक लगा दी गई है। आढ़ती को नोटिस जारी कर 24 घंटे में जवाब मांगा गया है।

कराह साहिब में भी दूसरे किसानों की जमीन इस्तेमाल करने का आरोप

पिहोवा के कराह साहिब खरीद केंद्र को लेकर भी भाकियू ने गंभीर आरोप लगाए हैं। यूनियन का दावा है कि गांव शाहपुर के किसानों के नाम पर पोर्टल में पंजीकरण कराया गया, जबकि उनकी फसल खेतों में खड़ी थी। इसके बाद दूसरी जगहों से धान लाकर मंडी में बिक्री दिखाई गई।

आरोप यह भी है कि खरीदा गया धान संबंधित आढ़ती के बेटे की राइस मिल में भेजा गया। भाकियू ने इस मामले में भी पंजीकरण से लेकर धान की खरीद और मिल तक पहुंचने के पूरे रिकॉर्ड की जांच की मांग की है।

जांच के बाद होगी कार्रवाई

पिहोवा मार्केट कमेटी के सचिव चंद्र सिंह ने बताया कि शिकायत मिलने पर मौके पर जांच की गई है। सभी तथ्यों और रिकॉर्ड की पड़ताल की जाएगी। उन्होंने कहा कि आरोप साबित होने पर संबंधित व्यापारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

फिलहाल इस पूरे मामले में लगाए गए आरोपों की जांच होना बाकी है। ऐसे में जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि पोर्टल पर पंजीकरण, फसल सत्यापन और धान की बिक्री में कहां गड़बड़ी हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।