प्रतीक पटनायक, धमतरी। कहते हैं कि सच्ची पत्रकारिता सिर्फ खबर दिखाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि उन लोगों की आवाज भी बनती है, जिन्हें समाज अक्सर अनदेखा कर देता है। इसकी एक मिसाल धमतरी में देखने को मिली है। पोस्टमार्टम किंग के नाम से मशहूर मोहन महारोलिया को आखिरकार वह सम्मान मिला, जिसके वे लंबे समय से हकदार थे। राज्योत्सव के अवसर पर जिला प्रशासन ने उन्हें सम्मानित किया।

मोहन महारोलिया की संघर्ष और समर्पण की कहानी को लल्लूराम डॉट कॉम ने प्रमुखता से उठाया था। उनकी मेहनत, सेवाभाव और योगदान को सामने लाते हुए उनके लिए उचित सम्मान की आवाज बुलंद की गई थी। अब मोहन को राज्योत्सव में सम्मान मिलना इस प्रयास का सुखद परिणाम माना जा रहा है।

18 साल की उम्र से शुरू किया था पोस्टमार्टम का काम

मोहन महारोलिया ने महज 18 साल की उम्र में पोस्टमार्टम का काम शुरू किया था। पिछले करीब 25 वर्षों से वे इस जिम्मेदारी को निभा रहे हैं। इस दौरान उन्होंने 7 हजार से अधिक पोस्टमार्टम किए हैं। उनका यह काम आसान नहीं है, लेकिन उन्होंने लगातार समर्पण और जिम्मेदारी के साथ अपनी सेवाएं दी हैं।

सम्मान मिलने पर भावुक हुए मोहन

राज्यस्तरीय आयोजन के दौरान जिला प्रशासन से सम्मान प्राप्त कर मोहन महारोलिया बेहद खुश नजर आए। उन्होंने लल्लूराम डॉट कॉम का आभार जताते हुए कहा कि लल्लूराम जैसे मीडिया संस्थान उन लोगों की आवाज बनते हैं, जिन्हें शायद कोई पहचानता तक नहीं। उनकी कहानी सामने आने के बाद आज उनका नाम पूरे प्रदेश में पहुंचा है और अलग-अलग जगहों से उन्हें सम्मान और आमंत्रण मिल रहे हैं।

मोहन ने कहा कि आज उन्हें महसूस हो रहा है कि उनकी वर्षों की मेहनत सफल हुई है। उन्होंने इस सम्मान और पहचान के लिए लल्लूराम डॉट कॉम का दिल से धन्यवाद किया। मोहन महारोलिया को मिला यह सम्मान सिर्फ एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि उन गुमनाम कर्मयोगियों के योगदान को पहचान देने की मिसाल है, जो वर्षों तक बिना किसी अपेक्षा के अपनी जिम्मेदारी निभाते रहते हैं।

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