अमित पाण्डेय, खैरागढ़। खैरागढ़ और राजनांदगांव जिले के किसानों के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण मानी जा रही लमती फीडर जलाशय परियोजना को बड़ा झटका लगा है। करीब 132 करोड़ रुपये के बैराज निर्माण से जुड़े टेंडर को जल संसाधन विभाग ने निरस्त कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब परियोजना वर्षों से विवादों, न्यायालयीन प्रक्रिया और प्रशासनिक अड़चनों में उलझी हुई थी।

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242 करोड़ की परियोजना का उद्देश्य

बता दें कि करीब 242 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली यह परियोजना क्षेत्रीय सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार की गई थी। इसका लक्ष्य खैरागढ़ और राजनांदगांव जिले के उन ग्रामीण क्षेत्रों तक सिंचाई सुविधा पहुंचाना है, जहां आज भी किसान पूरी तरह वर्षा पर निर्भर हैं। बैराज निर्माण के लिए लगभग 132 से 137 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया था।

चार वर्षों की प्रक्रिया के बाद मिली थी स्वीकृति

सूत्रों के अनुसार, इस परियोजना को मंजूरी मिलने में लगभग चार वर्षों की लंबी प्रक्रिया चली। तकनीकी स्वीकृति और बजट अनुमोदन के बाद इसे क्षेत्र की एक बड़ी विकास परियोजना के रूप में देखा जा रहा था। यहां तक कि पिछले वर्ष मुख्यमंत्री द्वारा इसका भूमिपूजन भी किया गया था, लेकिन उसके बावजूद निर्माण कार्य धरातल पर शुरू नहीं हो सका।

टेंडर प्रक्रिया के बाद शुरू हुआ विवाद

पिछले वर्ष अगस्त में बैराज निर्माण का टेंडर पूरा हुआ था, लेकिन इसके बाद दो ठेकेदारों के बीच पात्रता, तकनीकी दस्तावेज और योग्यता को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया। यह विवाद धीरे-धीरे प्रशासनिक स्तर से निकलकर न्यायालय तक पहुंच गया।

टेंडर विवाद से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

टेंडर विवाद के चलते मामला पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। लंबे समय तक चली कानूनी लड़ाई के कारण परियोजना का काम पूरी तरह ठप हो गया। इसी बीच विभागीय स्तर पर यह भी पाया गया कि प्रक्रिया समयसीमा और निविदा शर्तों के अनुपालन में कई अड़चनें हैं, जिससे परियोजना की स्थिति और जटिल हो गई।

जल संसाधन विभाग ने टेंडर को बताया अपूर्ण, किया निरस्त

लगातार कानूनी विवाद और प्रक्रिया संबंधी अनिश्चितता के बाद जल संसाधन विभाग ने 11 जून को टेंडर को अपूर्ण (incomplete) मानते हुए निरस्त करने का निर्णय लिया। अब विभाग को नई निविदा प्रक्रिया शुरू करनी होगी, जिससे परियोजना के क्रियान्वयन में और अधिक समय लगने की संभावना है।

विस्थापन का बड़ा संकट, 108 परिवार प्रभावित होने की आशंका

इस परियोजना के तहत प्रस्तावित बैराज से लछनाटोला गांव सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र माना जा रहा है। अनुमान के अनुसार लगभग 108 परिवारों को विस्थापित किया जा सकता है। इसके साथ ही करीब 170 हेक्टेयर भूमि जलाशय के डूबान क्षेत्र में आ सकती है, जिसमें बड़ी मात्रा में कृषि भूमि भी शामिल है।

ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता पुनर्वास और मुआवजे को लेकर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनकी पुश्तैनी जमीन और मकान ही उनकी आजीविका का आधार हैं। यदि परियोजना आगे बढ़ती है तो उन्हें न केवल गांव छोड़ना पड़ेगा, बल्कि रोजगार और खेती से भी वंचित होना पड़ सकता है। अभी तक स्पष्ट पुनर्वास योजना सार्वजनिक नहीं की गई है, जिससे असंतोष बढ़ रहा है।

ग्रामीणों क्यो कर रहें विरोध ?

ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया है कि जिस क्षेत्र को भविष्य में डूबान क्षेत्र बताया जा रहा है, वहां वर्तमान में सीसी रोड का निर्माण और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान निर्माण जैसे कार्य चल रहे हैं। ऐसे में लोग यह समझ नहीं पा रहे हैं कि यदि यह क्षेत्र डूबान में आने वाला है तो यहां सरकारी धन खर्च कर विकास कार्य क्यों किए जा रहे हैं।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर परियोजना से जुड़े सभी दस्तावेज, डूबान क्षेत्र का नक्शा और पुनर्वास योजना सार्वजनिक करने की मांग की है।

विभाग का दावा: परियोजना से बदल सकती है क्षेत्र की तस्वीर

वहीं जल संसाधन विभाग का दावा है कि यह परियोजना पूरी होने पर क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती है। बैराज में लगभग 9 एमसीएम पानी का भंडारण किया जा सकेगा, जिससे खैरागढ़ और राजनांदगांव जिले के लगभग 28 गांवों की 977 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। इससे किसानों की वर्ष भर सिंचाई निर्भरता कम होगी और कृषि उत्पादन में वृद्धि की संभावना है।

परियोजना फिलहाल अनिश्चितता में

फिलहाल लमती फीडर जलाशय परियोजना एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां एक ओर इसे क्षेत्रीय विकास और सिंचाई सुधार की बड़ी योजना माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर विस्थापन, भूमि डूबान और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हैं। टेंडर निरस्त होने के बाद परियोजना की दिशा और गति दोनों ही अनिश्चित हो गई हैं।

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