Odisha Desk, भुवनेश्वर: अनादि-अनंत महाप्रभु श्री जगन्नाथ की संपत्ति को लेकर एक बेहद आश्चर्यजनक और बड़ा खुलासा हुआ है। ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन के बयान के बाद यह बात सामने आई है कि भगवान जगन्नाथ की अचल संपत्ति केवल भारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सीमा पार पाकिस्तान के सिंध प्रांत में भी उनके नाम पर जमीन दर्ज है। इस खुलासे के बाद श्री जगन्नाथ मंदिर की विशाल भूमि और उसके ऐतिहासिक दस्तावेजों को लेकर एक बार फिर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) के पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ओडिशा के अलावा भारत के कई अन्य राज्यों में भी भगवान की संपत्ति चिन्हित की गई है। कानून मंत्री ने बताया कि वर्तमान में भगवान जगन्नाथ के नाम लगभग 36,000 एकड़ जमीन के आधिकारिक दस्तावेज (रिकॉर्ड) उपलब्ध हैं। हालांकि, ओडिशा के भीतर और बाहर मिलाकर महाप्रभु की कुल भूमि का दायरा लगभग 58,000 एकड़ होने का अनुमान है।

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में दर्ज भगवान जगन्नाथ की जमीन को लेकर अभी भी कई महत्वपूर्ण सवाल अनुत्तरित हैं। यह जमीन सिंध के किस जिले या इलाके में स्थित है, इसका कुल क्षेत्रफल कितना है, यह किस वर्ष या कालखंड से भगवान के नाम पर पंजीकृत है और वर्तमान में इस जमीन की स्थिति (कब्जा या उपयोग) क्या है—इन सभी बिंदुओं पर प्रशासनिक स्पष्टता आना अभी बाकी है।

इतिहासकारों का मानना है कि देश के विभाजन से पहले (अखंड भारत के दौरान) सिंध क्षेत्र के समृद्ध श्रद्धालुओं अथवा राजा-रजवाड़ों ने महाप्रभु के प्रति अपनी अपार श्रद्धा के कारण यह भूमि देवोत्तर संपत्ति के रूप में समर्पित की होगी।

जमीनों की सुरक्षा के लिए ‘श्री जगन्नाथ मंदिर भूमि प्रबंधन नियम, 2026’ लागू

महाप्रभु की संपत्तियों की सुरक्षा और सही रखरखाव को ध्यान में रखते हुए ओडिशा सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। सरकार ने ‘श्री जगन्नाथ मंदिर भूमि प्रबंधन नियम, 2026’ (Shree Jagannath Temple Land Management Rules, 2026) लागू किया है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य भगवान की अचल संपत्तियों की अवैध कब्जे से सुरक्षा करना, भू-बंदोबस्त की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाना है।

फिलहाल, पाकिस्तान के सिंध प्रांत में स्थित जमीन के संबंध में अधिक विवरण की प्रतीक्षा की जा रही है। उम्मीद है कि मंदिर प्रशासन और राज्य सरकार जल्द ही इन दस्तावेजों की जांच कर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट करेंगे।

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