अजय सैनी, भिवानी। पावर ग्रिड के खिलाफ किसानों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। अपनी अधिग्रहीत जमीनों के उचित मुआवजे की मांग को लेकर किसानों का अनिश्चितकालीन धरना सोमवार को 35वें दिन भी पूरी मजबूती के साथ जारी रहा। सरकार की कथित तानाशाही नीतियों से नाराज किसानों ने उग्र प्रदर्शन करते हुए केंद्र सरकार और देश के प्रधानमंत्री का पुतला फूंका और जोरदार नारेबाजी की।

क्या है पूरा विवाद

धरने की अध्यक्षता रोहतास सैनी ने की, जबकि मंच का संचालन रामेहर बागनवाला ने संभाला। इस दौरान ग्राम स्वराज किसान मोर्चा के जिला महासचिव जंगबीर अलखपुरा ने सरकार और कंपनियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पावर ग्रिड कंपनियां किसानों की जमीनों पर टावर और लाइनें बिछाकर भारी मुनाफा कमा रही हैं, जबकि जमीन देने वाले किसानों को केवल एक बार नाममात्र का मुआवजा देकर पल्ला झाड़ लिया जाता है। किसानों का आरोप है कि अब प्रशासन उस मामूली मुआवजे में भी आनाकानी कर रहा है, जिसे वे किसी भी कीमत पर सहन नहीं करेंगे।

युवाओं और छात्रों को मिला समर्थन

किसानों ने सिर्फ अपनी मांगों तक सीमित न रहकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे छात्रों और युवाओं का भी खुला समर्थन किया। किसान नेताओं का कहना है कि सरकार देश के अन्नदाता और युवाओं दोनों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। किसानों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक उन्हें उनकी जमीन का बाजार भाव के अनुसार सही मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा और पावर ग्रिड का काम भी सुचारू रूप से नहीं चलने दिया जाएगा। इस मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय किसान और ग्रामीण मौजूद रहे।

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