“Love conquers all.” संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्। सुखी पारिवार के लिए ऋग्वेद का यह श्लोक सबसे उपयुक्त सूत्र है जिसका अर्थ है साथ चलें, मिलकर संवाद करें और अपने हृदय में सद्भाव रखें। एक प्रसिद्ध अँग्रेज़ी पंक्ति “Love conquers all.” भी प्रेम का समर्थन करते हुए कहती है ‘प्रेम कठिन से कठिन परिस्थिति का सामना करने की शक्ति देता है।’ प्रेम और त्याग की पराकाष्ठा का दर्शन कराने वाले व्रत और त्योहार भारत में ही दिखाई देते हैं। आज देश भर में मनाया जाने वाला भारत की सांस्कृतिक परंपराओं का व्रत करवा चौथ, प्रेम, विश्वास, त्याग और दांपत्य जीवन की मधुरता पर आधारित है।
सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै॥ दांपत्य जीवन में सहयोग और सामंजस्य की प्रेरणा देने वाले इस सुभाषित का अर्थ है हम सबकी रक्षा हो, हम मिलकर आगे बढ़ें और हमारी शक्ति में वृद्धि हो।
‘त्याग, प्रेम का पोषण है।’ परंपरा का निर्वहन करते हुए भारतीय महिलाएँ इस दिन अपने पति की दीर्घायु और सुखमय वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए स्त्रियाँ निर्जला व्रत रखती हैं। चंद्रमा को अर्घ्य देकर छलनी से चाँद और फिर पति का चेहरा देखने के पश्चात ही वे व्रत खोलती हैं।
करवाचौथ में सुनाई जाने वाली वीरवती की कथा, नियमों के प्रति सजगता और धैर्य का संदेश देती है। करवा माता की कथा मानव के संकल्प की शक्ति दर्शाती है और सत्यवान-सावित्री की गाथा बुद्धिमत्ता, साहस और अटूट निष्ठा का परिचय देती है। इन कथाओं का मूल भाव प्रेम की पवित्रता और विपरीत परिस्थितियों में भी विश्वास बनाए रखने का संदेश है। धीरज धरम मित्र अरु नारी। आपद काल परिखिअहिं चारी॥ रामचरित मानस की इस चौपाई का आशय है धैर्य, धर्म, मित्र और जीवनसाथी की पहचान विपत्ति के समय होती है। कठिन परिस्थितियों में एक-दूसरे का साथ निभाना रिश्तों की वास्तविक परीक्षा है।
आध्यात्मिक दृष्टि से करवा चौथ हमें सिखाता है कि रिश्ते केवल परंपराओं से मज़बूत नहीं होते बल्कि परस्पर सम्मान, संवाद, सहयोग और जिम्मेदारी से सम्बन्धों में जान आती है। एक-दूसरे के स्वास्थ्य, सुख और सम्मान का ध्यान रखें तभी दांपत्य जीवन वास्तव में मंगलमय बनता है। “A successful marriage requires falling in love many times, always with the same person.” सफल वैवाहिक जीवन में बार-बार उसी जीवनसाथी के प्रेम में पड़ने जैसा अपनापन आवश्यक है।
इस पंक्ति को सौ बात की एक बात कही जा सकती है “Where there is love, there is life.” जहाँ प्रेम है वहीं आनंदित जीवन है। आज आवश्यकता इस बात की है कि इस पर्व को केवल उपवास और चाँद के दर्शन तक सीमित न रखते हुए पति भी पत्नी के त्याग और भावनाओं का सम्मान करें तथा उसके स्वास्थ्य और प्रसन्नता का ध्यान रखें। प्रेम में समानता, विश्वास में दृढ़ता और व्यवहार में संवेदनशीलता ही सुखी परिवार की नींव होती हैं। प्रेम, प्रार्थना बने और विश्वास, व्यवहार में उतरे, तभी दांपत्य जीवन एक सुंदर साधना बन जाता है।
सौरज धीरज तेहि रथ चाका। सत्य सील दृढ़ ध्वजा पताका॥ दांपत्य जीवन जिन गुणों से सुदृढ़ बनता है उस ओर संकेत देने वाली इस चौपाई का अर्थ है साहस और धैर्य जीवन के रथ के पहिए हैं और सत्य और सदाचार उसकी ध्वजा हैं। करवा चौथ का वास्तविक सौंदर्य तभी है जब रिश्तों में विश्वास हो, परिवार में सद्भाव हो और जीवनसाथी एक-दूसरे के सुख-दुःख में समान रूप से सहभागी बनें।

संदीप अखिल
सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम
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