विज्ञान को पौराणिक मिथकों से जोड़ना विज्ञान का अपमान, विरोध में छात्रों और बुद्धिजीवियों ने निकाली कैंडल मार्च  

अंबिकापुर- जालंधर के लवली यूनिवर्सिटी में हाल ही में आयोजित 106वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस में अनेक वक्ताओं ने नितांत विज्ञान विरोधी और पुनरुत्थानवादी बातें करने का आरोप शहर के स्थानीय छात्र, बुद्धिजीवी और विज्ञान प्रेमियों ने लगाया है. विज्ञान के इस अपमान और अवमानना के प्रति विरोध प्रगट करने स्थानीय छात्रों एवं नागरिकों ने स्थानीय घड़ी चौक में प्रदर्शन किया.

प्रदर्शन के बाद छात्रों ने कहा कि रामायण, महाभारत और अन्य कई भारतीय मिथकों में मिलने वाले काव्यात्मक विवरणों को यथार्थ वैज्ञानिक अविष्कार और तकनीक मानते हुए अनेक बेतुकी स्थापनाएं की. अनेक उन्नत वैज्ञानिक सिद्धांतों को उन्होंने वर्तमान राजनेताओं से जोड़ते हुए गलत वक्तव्य दिए. सबसे हैरानी की बात है कि इस कार्यक्रम का उद्घाटन स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया था. इससे पूरे विश्व में भारत की छवि ख़राब होती है, विज्ञान के गंभीर अध्ययन-अध्यापन और शोध को गंभीर नुकसान होता है और देश का वैज्ञानिक विकास कुंठित होता है.

छात्रों ने कहा कि हाल के वर्षों में विज्ञान के नाम पर ऐसी अवैज्ञानिक बयानबाज़ी बहुत बढ़ी है. कोई कर्ण को टेस्ट ट्यूब बेबी बताता है, तो कोई कौरवों को. कोई गणेश के सिर को प्लास्टिक सर्जरी कहता है, तो कोई राहु-केतु को. कोई विष्णु के सुदर्शन चक्र को गाइडेड मिसाइल बताता है, तो कोई रावण के विमानों को फाइटर एयरक्राफ़्ट कहता है. कोई दशावतार को डार्विन के सिद्धांत से बेहतर बताता है, तो कोई वेदों को आइंस्टीन के सिद्धांत से अधिक सटीक कहता है. कोई गुरुत्वाकर्षण तरंगों का नाम मोदी तरंग रखना चाहता है, तो कोई गुरुत्वाकर्षण के लेंसिंग इफ़ेक्ट का नाम हर्षवर्धन इफ़ेक्ट. यह सब विज्ञान के शोध के नाम पर, विज्ञान के अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में हो रहा है.

 

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