लखनऊ के ब्राह्मणी टोला में तीन लोगों की हत्या के मामले में शुक्रवार को डीजीपी राजीव कृष्ण और अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद ने घटनास्थल का निरीक्षण किया. पीड़ित परिवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई के प्रयास, सुरक्षा और आरोपियों को सजा दिलाने के लिए प्रभावी पैरवी का भरोसा दिया गया.
लखनऊ. पुराने लखनऊ के सआदतगंज क्षेत्र के ब्राह्मणी टोला में हुए तिहरे हत्याकांड के बाद पुलिस और प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है. शुक्रवार को अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद और पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण घटनास्थल पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया. दोनों अधिकारियों ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली और उन्हें न्याय दिलाने के साथ सुरक्षा का भरोसा दिया.
फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई
डीजीपी राजीव कृष्ण ने परिजनों को बताया कि मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने का प्रयास किया जाएगा. उन्होंने आश्वासन दिया कि आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए प्रभावी तरीके से पैरवी की जाएगी.
अधिकारियों ने परिवार के सदस्यों से घटना से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर बातचीत की. साथ ही उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का भरोसा भी दिलाया.
पार्किंग विवाद में हुई थी हत्या
यह वारदात 26 अक्टूबर को सआदतगंज के नौबस्ता स्थित ब्राह्मणी टोला में हुई थी. पार्किंग और चबूतरे को लेकर दो पक्षों के बीच शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक हो गया था.
आरोप है कि इस दौरान ऋषभ शुक्ला ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं. गोलीबारी में शिवेंद्र तिवारी उर्फ शंभू, उनके भाई शिवाजी तिवारी और शिवाजी के बेटे सुयश तिवारी की मौत हो गई थी.
घटना के वीडियो हुए वायरल
हत्याकांड के बाद सोशल मीडिया पर घटना से जुड़े कई वीडियो सामने आए हैं. इनमें दोनों पक्षों के बीच मारपीट और इसके बाद गोलीबारी होती दिखाई दे रही है.
एक अन्य वीडियो में पुलिस आरोपी ऋषभ शुक्ला को पकड़ते हुए नजर आ रही है. वीडियो में उसके पास से पिस्टल बरामद किए जाने का दृश्य भी दिखाई देता है. इन वीडियो के सामने आने के बाद मामले में पुलिस की कार्रवाई और घटना से जुड़े कई पहलुओं पर फिर चर्चा शुरू हो गई.
आरोपी के मकान की नापजोख
हत्याकांड के आरोपी ऋषभ शुक्ला के मकान में कथित अवैध निर्माण को लेकर भी प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हो गई है. शुक्रवार को लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की टीम मशीनों के साथ मौके पर पहुंची और मकान की नापजोख शुरू की.
घटना के बाद से ही आरोपी के मकान के अवैध हिस्से को हटाने की मांग उठ रही थी. पीड़ित परिवार ने पहले आरोप लगाया था कि कार्रवाई के नाम पर अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचकर केवल औपचारिकता पूरी करते हैं, लेकिन अवैध निर्माण को हटाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते.
परिजनों का कहना था कि अधिकारी मौके पर तस्वीरें खिंचवाकर लौट जाते हैं और निर्माण जस का तस बना रहता है. अब एलडीए की टीम दोबारा मशीनों के साथ पहुंची है और मकान की नापजोख कर रही है.
इस बीच डीजीपी राजीव कृष्ण और अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद ने घटनास्थल का निरीक्षण कर पीड़ित परिवार को सुरक्षा और न्याय का भरोसा दिया.

