बड़कागांव (हजारीबाग)। झारखंड के हजारीबाग जिले के बड़कागांव प्रखंड स्थित सीकरी गांव में बुधवार देर रात आसमान से पैराशूट लगा एक रहस्यमयी उपकरण गिरने से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। उपकरण सहदेव राम के घर के पास गिरा। उस पर लाल रंग की लाइट चमक रही थी और लगे लेबल पर ‘मेड इन कोरिया’ लिखा हुआ था। आसमान से अचानक इस तरह उपकरण गिरने की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। गांव में इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और उपकरण को अपने कब्जे में ले लिया।
पैराशूट के साथ गिरा चमकता उपकरण, देखने उमड़े ग्रामीण
ग्रामीणों के अनुसार, बुधवार देर रात आसमान से एक चमकता हुआ उपकरण पैराशूट के साथ नीचे गिरता दिखाई दिया। उपकरण पर लाल रंग की लाइट जल रही थी। सुबह इसकी जानकारी आसपास के गांवों में फैली तो लोग उसे देखने के लिए पहुंचने लगे। दो दिनों तक गांव में इस उपकरण को लेकर चर्चाओं का दौर चलता रहा। कोई इसे किसी विशेष तकनीक से जुड़ा उपकरण बता रहा था, तो कोई इसकी उत्पत्ति को लेकर सवाल उठा रहा था।
पुलिस ने कब्जे में लिया रेडियोसोंडे, मॉडल WHR-301D
घटना की सूचना मिलने पर सीकरी ओपी प्रभारी रामकुमार राम और अवर निरीक्षक निरंजन प्रकाश पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने उपकरण को अपने कब्जे में ले लिया।
उपकरण पर लगे लेबल के अनुसार, यह वेदर्ली कंपनी का रेडियोसोंडे है। इसका मॉडल WHR-301D बताया गया है। लेबल पर ‘मेड इन कोरिया’ के साथ जनवरी 2026 की तारीख भी अंकित है। मौके पर वार्ड सदस्य पृथ्वीराज गुप्ता सहित कई ग्रामीण मौजूद थे।
क्या होता है रेडियोसोंडे, आसमान में क्यों छोड़ा जाता है?
रेडियोसोंडे एक छोटा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जिसका इस्तेमाल वायुमंडल की स्थिति से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाने के लिए किया जाता है। इसे आमतौर पर मौसम संबंधी गुब्बारे के साथ आसमान में छोड़ा जाता है। ऊंचाई पर पहुंचने के बाद यह विभिन्न सेंसरों की मदद से मौसम के आंकड़े जुटाता है और रेडियो सिग्नल के जरिए उन्हें जमीन पर मौजूद रिसीविंग स्टेशन तक भेजता है।
तापमान, नमी और हवा की गति की देता है जानकारी
रेडियोसोंडे की मदद से अलग-अलग ऊंचाइयों पर हवा का तापमान, वायुमंडल में नमी और वायुदाब मापा जाता है। कुछ प्रणालियों में हवा की गति और दिशा से जुड़ी जानकारी भी मिलती है। इन आंकड़ों के आधार पर मौसम वैज्ञानिक वायुमंडल की स्थिति समझते हैं और मौसम का पूर्वानुमान तैयार करने में मदद लेते हैं।
गुब्बारा फटने के बाद पैराशूट से नीचे उतरता है उपकरण
मौसम संबंधी गुब्बारे को जब आसमान में छोड़ा जाता है, तो ऊंचाई बढ़ने के साथ बाहरी वायुदाब कम होने के कारण उसका आकार बढ़ता जाता है। एक निश्चित ऊंचाई पर गुब्बारा फट सकता है। इसके बाद उससे जुड़ा रेडियोसोंडे नीचे उतरने लगता है। कई प्रणालियों में उपकरण को सुरक्षित जमीन तक लाने के लिए पैराशूट लगाया जाता है।
हालांकि, सीकरी गांव में मिला उपकरण किन परिस्थितियों में नीचे आया, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसकी वास्तविक पहचान, स्रोत और इस्तेमाल से जुड़ी पूरी जानकारी संबंधित विभाग की पुष्टि के बाद ही स्पष्ट होगी।
थाना प्रभारी बोले- डरने की जरूरत नहीं
थाना प्रभारी रामकुमार राम ने बताया कि ग्रामीणों को इस उपकरण से डरने की जरूरत नहीं है। उनके अनुसार, यह मौसम संबंधी जानकारी जुटाने वाला रेडियोसोंडे उपकरण है। उन्होंने कहा कि उपकरण पर कोरिया का उल्लेख है और भारत में भी इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, उपकरण पर किसी देश का नाम लिखा होना उसके वास्तविक स्रोत और सीकरी में गिरने की वजह की पूरी पुष्टि नहीं करता।
समस्तीपुर, जमशेदपुर और बंगाल में भी गिर चुका है ऐसा उपकरण
आसमान से रेडियोसोंडे उपकरण गिरने की यह पहली घटना नहीं है। इसी साल 23 अक्टूबर को बिहार के समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर इलाके में भी रात के अंधेरे में ऐसा उपकरण गिरा था। इसके अलावा झारखंड के जमशेदपुर जिले के बहरागोड़ा में अगस्त में और पश्चिम बंगाल के पूर्वी वर्दमान में जनवरी में भी इस तरह का उपकरण गिरने की घटनाएं सामने आई थीं।

