मोहम्मद करीमुल्लाह, मधुबनी। भाकपा कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों का यह विशाल जुलूस शहर के टाउन क्लब मैदान से शुरू होकर रेलवे स्टेशन, थाना चौक और समाहरणालय के मुख्य द्वार तक निकाला गया, जहां यह एक नुक्कड़ सभा में तब्दील हो गया। सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा छात्र-नौजवानों के इस ऐतिहासिक आंदोलन की सबसे बड़ी जीत है।
वक्ताओं ने आगे कहा कि लोकतंत्र के हत्यारे एनडीए सरकार के मुखिया प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को आखिरकार छात्रों के आक्रोश के आगे झुकना पड़ा, जिससे संपूर्ण देश के नौजवानों और छात्र-छात्राओं का विश्वास दोगुना बढ़ा है। केंद्र सरकार ने आंदोलन को दबाने, कमजोर करने और तोड़ने का हर संभव प्रयास किया था, परंतु नौजवानों और छात्रों की चट्टानी एकता तथा संघर्ष के प्रति कटिबद्धता ने सरकार को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।
सरकार के दोहरे चरित्र की निंदा और प्रमुख मांगें
वक्ताओं ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि आंदोलन के दौरान यह सहमति बनी थी कि कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी और सभी मुकदमे वापस लिए जाएंगे। परंतु, इसके बावजूद जंतर-मंतर और पटना में निर्दोष छात्रों व नौजवानों को रास्तों, बाजारों और कोचिंग से घर लौटने के क्रम में पुलिस द्वारा पकड़ा जा रहा है। उन्हें गुमनाम स्थानों पर ले जाया जा रहा है और परिवार वालों से बात भी नहीं करने दी जा रही है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी केंद्र और बिहार सरकार के इस दोहरे चरित्र की कड़ी निंदा करती है। पार्टी ने मांग की है कि सरकार आंदोलन की सभी शर्तों का पूरी तरह पालन करे और सभी गिरफ्तार आंदोलनकारियों को तुरंत रिहा करे। इसके साथ ही, आंदोलन में प्रभावित हुए छात्र-नौजवानों के परिवारों को अविलंब अधिकतम सरकारी सहायता देने की भी मांग उठाई गई।
संकल्प और श्रद्धांजलि
प्रदर्शन के अंत में सभी कार्यकर्ताओं ने आंदोलन के शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। छात्रों और नौजवानों को इस बड़ी जीत की बधाई देते हुए केंद्र सरकार की नौजवान विरोधी और किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ आने वाले समय में चरणबद्ध आंदोलन और अधिक तेज करने का दृढ़ संकल्प लिया गया।
इस विरोध प्रदर्शन में पार्टी जिला कार्यकारिणी सदस्य बलराम यादव, अजय कुमार वर्मा, मो. साबिर, सत्यनारायण यादव, श्रीप्रसाद यादव और भोगी पासवान सहित विभिन्न अंचलों के दर्जनों साथी शामिल हुए।


