सङ्गच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्। एकता और सामूहिक प्रयास को शक्ति देने वाला ऋग्वेद का यह श्लोक मध्य प्रदेश के संदर्भ में प्रासंगिक है जिसका अर्थ है – हम साथ चलें, मिलकर संवाद करें और हमारे विचारों में एकता हो।

                   किसी भी समाज और प्रदेश की वास्तविक उन्नति उसके नागरिकों के सुख, सम्मान और कल्याण में होती है। मध्य प्रदेश स्थापना दिवस राज्य के गठन की वर्षगाँठ के अलावा प्रदेश के विकास, सामाजिक समरसता और बेहतर भविष्य के संकल्प को दोहराने का अवसर भी है।

              भारत का हृदय है मध्य प्रदेश जो अपनी प्राकृतिक संपदा, ऐतिहासिक गौरव, आध्यात्मिक परंपराओं, जनजातीय संस्कृति और मेहनतकश जनता के कारण विशिष्ट पहचान रखता है। 1 नवंबर 1956 को अस्तित्व में आए मध्य प्रदेश ने अपने सात दशकों की यात्रा में अनेक उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। वर्ष 2026 में मनाया जाने वाला 71वाँ स्थापना दिवस हमें इसके अतीत के गौरव के साथ भविष्य की जिम्मेदारियों का भी बोध कराता है।

               प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार विकास को जनकल्याण से जोड़ने की दिशा में प्रयासरत है। केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार और राज्य की सरकार के बीच समन्वय को ही डबल इंजन की सरकार के रूप में देखा जाता है। इस समन्वय का उद्देश्य विकास योजनाओं को गति देना, बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना और समाज के अंतिम व्यक्ति तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाना ही होता है। मगर इन प्रयासों की वास्तविक सफलता तभी मानी जा सकती है जब उनका लाभ जरूरतमंद परिवारों तक प्रभावी ढंग से पहुँचे और लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे।

                     मध्य प्रदेश में इस वर्ष का किसान कल्याण वर्ष और ‘समृद्ध किसान, समृद्ध प्रदेश’ का संकल्प विशेष महत्व रखने वाला है। जैसा कि सर्वविदित है कि किसान अन्नदाता होने के साथ ही साथ  प्रदेश की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण जीवन की मज़बूत नींव भी होता है। खेती को आधुनिक तकनीक, बेहतर सिंचाई, कृषि नवाचार, उचित बाजार और मूल्य संवर्धन से जोड़ना ज़रूरी है। क्योंकि जब किसानों की आय, सम्मान और सुरक्षा बढ़ेगी तभी गाँव समृद्ध होंगे और प्रदेश की प्रगति अधिक व्यापक होगी।

                    मध्य प्रदेश के युवाओं के लिए राज्य का स्थापना दिवस आत्ममंथन का अवसर भी है। प्रदेश के युवाओं से अपेक्षा है कि वे भी सिर्फ़ नौकरी की प्रतीक्षा करने वाले ना बनें  बल्कि कौशल, नवाचार, उद्यमिता और स्वरोजगार के माध्यम से अवसर पैदा करने वाले बनें। राज्य सरकार को भी चाइए कि वो शिक्षा को रोज़गार से जोड़ें, और भी डिजिटल क्षमताएँ विकसित करें  और स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित क़रें क्योंकि यही समय की माँग है। राज्य सरकार, शिक्षण संस्थानों, उद्योग जगत और समाज को मिलकर युवाओं के सपनों को उचित दिशा देनी होगी।

                    मध्य प्रदेश के विकास की इस यात्रा में महिलाओं का सशक्तीकरण, गरीबों का सम्मान, जनजातीय समुदायों की विरासत का संरक्षण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ और पर्यावरण की रक्षा यह सभी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। सड़कें, उद्योग और भवन किसी भी राज्य के लिए प्रगति के प्रतीक होते हैं मगर संवेदनशील समाज, ईमानदार नागरिक और मजबूत सामाजिक संबंध उसकी आत्मा होती है।

                     प्रदेश की राजधानी भोपाल से लेकर प्रदेश के दूरस्थ गाँवों तक स्थापना दिवस का एक ही संदेश का सम्प्रेषण होना चाहिए कि मध्य प्रदेश के विकास में हम सबकी भागीदारी होगी। राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं लेकिन प्रदेश का हित, सामाजिक सद्भाव और नागरिकों का कल्याण हम सभी की साझा प्राथमिकता होगी।

याद रहे स्थापना दिवस सिर्फ़ उत्सव नहीं, सभी के लिए अपने कर्तव्यों का संकल्प दिवस भी है। किसान को सम्मान, युवा को अवसर, महिला को समान अधिकार और प्रत्येक नागरिक को गरिमापूर्ण जीवन ही प्रथम दृष्टया किस भी राज्य की सच्ची प्रगति है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार और केंद्र सरकार के समन्वित प्रयासों को जनभागीदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही से और प्रभावी बनाया जा सकता है।

मध्य प्रदेश का भविष्य सरकारी योजनाओं के साथ सरकार के प्रयासों, नागरिकों के विश्वास और समाज के सामूहिक पुरुषार्थ से बनेगा। कामना यही है कि ‘एक समृद्ध, आत्मनिर्भर और संवेदनशील राज्य के रूप में मध्य प्रदेश अपनी पहचान को स्थायित्व देगा।

संदीप अखिल

सलाहकार संपादक

न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम