मद्रास हाई कोर्ट ने वैवाहिक संबंधों और क्रूरता से जुड़े एक मामले में अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि पति का किसी दूसरी महिला के साथ अवैध संबंध होना अपने आप में पत्नी के प्रति क्रूरता का अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। अभियोजन पक्ष को इसके अलावा भी ठोस सबूत पेश करने होंगे।

IPC 498A और BNS की धाराओं पर कोर्ट की टिप्पणी

जस्टिस सुंदर मोहन ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कहा कि क्रूरता के आरोप साबित करने के लिए केवल विवाहेतर संबंध का हवाला देना पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पिनाकिन महीपतराय रावल बनाम गुजरात राज्य का भी उल्लेख किया।

महिला ने डेढ़ साल के बच्चे के साथ की थी आत्महत्या

मामले में महिला ने अपने डेढ़ साल के बच्चे के साथ आत्महत्या कर ली थी। आरोप था कि पति के अवैध संबंधों और दहेज के लिए प्रताड़ना के कारण उसने यह कदम उठाया। हालांकि, 23 अप्रैल 2018 को ट्रायल कोर्ट ने सबूतों के अभाव में पति को सभी आरोपों से बरी कर दिया था।

हाई कोर्ट ने अपील की खारिज

मृतका के भाई ने बरी किए जाने के फैसले को मद्रास हाई कोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष दहेज उत्पीड़न और क्रूरता के आरोपों को पर्याप्त सबूतों से साबित नहीं कर सका। कोर्ट ने अपील खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि आपराधिक दोषसिद्धि के लिए आरोपों का प्रमाणित होना जरूरी है।

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