मुकेश मेहता, बुधनी (सीहोर)। मां विजयासन धाम सलकनपुर स्थित महामंडलेश्वर उत्तम स्वामी के आश्रम में इस बार आयोजित तीन दिवसीय शरद पूर्णिमा उत्सव कई मायनों में चर्चा का विषय बन गया। करीब दो दशक से हर साल होने वाले इस आयोजन में इस बार न तो उत्तम स्वामी की उपस्थिति नजर आई और न ही आश्रम परिसर में पहले की तरह उनकी बड़ी-बड़ी तस्वीरें दिखाई दीं। आयोजन के आमंत्रण पत्र और फ्लेक्स पोस्टरों पर भी उनकी तस्वीरें नजर नहीं आईं। इस बदलाव ने आयोजन को लेकर क्षेत्र में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

दो दशक पुरानी परंपरा में इस बार क्या बदला?

स्थानीय स्तर पर लंबे समय से चर्चा में रहने वाले इस उत्सव में पहले महामंडलेश्वर उत्तम स्वामी स्वयं उपस्थित रहते थे। आश्रम के भीतर और बाहर उनकी बड़ी तस्वीरें लगी रहती थीं। लेकिन इस बार आयोजन का स्वरूप बदला हुआ दिखाई दिया। कार्यक्रम का आयोजन समर्पण सेवा समिति के नाम से किया गया। आयोजन से जुड़े इन बदलावों ने श्रद्धालुओं और क्षेत्र के लोगों का ध्यान खींचा।

आरोपों के बाद से सार्वजनिक कार्यक्रमों में नहीं दिखे स्वामी

गौरतलब है कि कुछ समय पहले एक महिला की ओर से महामंडलेश्वर उत्तम स्वामी पर आरोप लगाए जाने के बाद यह मामला मीडिया में व्यापक रूप से चर्चा में रहा था। हालांकि, इन आरोपों की सत्यता और मामले की वर्तमान कानूनी स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। इस घटनाक्रम के बाद से स्वामी सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं। ऐसे में शरद पूर्णिमा जैसे पारंपरिक आयोजन में उनकी अनुपस्थिति और आश्रम परिसर में तस्वीरों का नहीं दिखना चर्चा का विषय बना हुआ है।

आमंत्रण पत्र से नेताओं के नाम भी गायब

इस बार आयोजन के आमंत्रण पत्र में एक और बदलाव देखने को मिला। पूर्व के आयोजनों में मुख्यमंत्री समेत कई प्रमुख नेताओं के नाम आमंत्रण पत्र पर शामिल किए जाते थे और जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित भी किया जाता था। इस बार क्षेत्रीय विधायक और सांसद के नाम भी आमंत्रण पत्र पर नजर नहीं आए। इसके साथ ही किसी बड़े नेता की प्रमुख उपस्थिति भी दिखाई नहीं दी।

क्षेत्रीय नेताओं और लोगों की दूरी भी चर्चा में

आयोजन के दौरान क्षेत्रीय नेताओं और आम लोगों की पहले जैसी भागीदारी नजर नहीं आने की चर्चा भी रही। हालांकि, इस बार जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया था या नहीं और उनकी अनुपस्थिति के पीछे क्या कारण रहे, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

कई सवाल छोड़ गया इस बार का आयोजन

करीब 20 वर्षों से चली आ रही परंपरा के बीच इस बार आयोजन का बदला स्वरूप कई सवाल छोड़ गया है। क्या यह केवल आयोजन की व्यवस्था में बदलाव है या हालिया घटनाक्रम का असर? उत्तम स्वामी की अनुपस्थिति, पोस्टरों, आमंत्रण पत्रों से उनकी तस्वीरों का गायब होना और जनप्रतिनिधियों की सीमित भागीदारी को लेकर फिलहाल आयोजकों की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आयोजन समिति और आश्रम प्रबंधन इन बदलावों को लेकर क्या सफाई देते हैं।

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