हकीमुद्दीन नासिर, महासमुंद। किसी भी अस्पताल में गंभीर मरीजों की जान बचाने के लिए गहन चिकित्सा इकाई यानी ICU की अहम भूमिका होती है। लेकिन महासमुंद के जिला अस्पताल से संबद्ध शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल में करीब 20 वर्षों से ICU की सुविधा नहीं है। कोविड काल में लाखों रुपये खर्च कर अस्पताल को 15 वेंटिलेटर तो मिले, लेकिन ICU शुरू नहीं होने से इनमें से 6 मशीनें खराब हो चुकी हैं, जबकि बाकी मशीनें इस्तेमाल के इंतजार में हैं।

नतीजा यह कि गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है। अस्पताल प्रबंधन स्टाफ की कमी का हवाला दे रहा है, तो राजनीतिक दल एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। ऐसे में सवाल है कि आखिर महासमुंद के मरीजों को ICU की सुविधा कब मिलेगी? देखिए यह खास रिपोर्ट।

12 लाख की आबादी वाले जिले में 330 बिस्तरों का अस्पताल
महासमुंद जिले की आबादी वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक करीब 10 लाख 32 हजार थी, जो अब बढ़कर लगभग 12 लाख होने का अनुमान है। जिले में वर्ष 2006 में 100 बिस्तरों वाला जिला अस्पताल शुरू हुआ। इसके बाद वर्ष 2021 में मेडिकल कॉलेज खुला और जिला अस्पताल को शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध कर 330 बिस्तरों वाले अस्पताल में तब्दील कर दिया गया।

आज यहां महासमुंद के अलावा गरियाबंद और बलौदाबाजार जिले से भी मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल की ओपीडी में हर दिन करीब 550 मरीज आने का दावा किया जा रहा है। लेकिन इतने बड़े अस्पताल में गंभीर मरीजों के इलाज के लिए अब तक ICU की सुविधा शुरू नहीं हो पाई है। कोविड महामारी के दौरान ICU के लिए प्रधानमंत्री राहत कोष से 6 और सीजीएमएससी के माध्यम से 9 वेंटिलेटर उपलब्ध कराए गए थे। कुल 15 वेंटिलेटर में से 6 खराब हो चुके हैं, जबकि बाकी 9 मशीनें ICU में इस्तेमाल होने का इंतजार कर रही हैं।
हर दिन 2 से 3 गंभीर मरीजों को करना पड़ता है रेफर
अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, यहां से हर दिन औसतन 10 मरीजों को अलग-अलग कारणों से रेफर किया जाता है। इनमें करीब 2 से 3 मरीज गंभीर स्थिति वाले होते हैं, जिन्हें लगातार चिकित्सकीय निगरानी और गहन चिकित्सा की जरूरत पड़ सकती है। इस हिसाब से हर महीने लगभग 60 से 90 गंभीर मरीजों को ICU जैसी सुविधा की आवश्यकता पड़ने का अनुमान है। गहन चिकित्सा इकाई यानी ICU ऐसी सुविधा है, जहां गंभीर रूप से बीमार मरीजों की चौबीसों घंटे निगरानी की जाती है। दुर्घटना में गंभीर चोट, जटिल सर्जरी, हृदय रोग, सांस लेने में गंभीर परेशानी तथा किडनी और लीवर से जुड़ी गंभीर समस्याओं के मामलों में इसकी जरूरत पड़ सकती है।

गर्भवती महिलाओं में गंभीर जटिलताओं के दौरान भी गहन चिकित्सा की आवश्यकता हो सकती है। लेकिन महासमुंद के जिला अस्पताल में ICU नहीं होने से ऐसे मरीजों को जरूरत के मुताबिक उच्च चिकित्सा केंद्रों में रेफर करना पड़ता है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं गंभीर मरीजों को समय पर उचित उपचार उपलब्ध कराने की चुनौती भी बनी रहती है।
इसी साल ICU शुरू होने की उम्मीद
अस्पताल प्रबंधन लंबे समय से ICU शुरू करने के लिए शासन से मांग किए जाने की बात कह रहा है और इस साल सुविधा शुरू करने की उम्मीद भी जता रहा है। हालांकि, स्टाफ की उपलब्धता और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं पूरी होने के बाद ही ICU का नियमित संचालन संभव होगा।
सरकारें आईं-गईं, लेकिन नहीं मिली ICU की सुविधा
प्रदेश में वर्ष 2003 से 2018 तक भाजपा की सरकार रही। इसके बाद वर्ष 2018 से 2023 तक कांग्रेस सत्ता में रही और दिसंबर 2023 से प्रदेश में फिर भाजपा की सरकार है। लेकिन महासमुंद जिला अस्पताल में ICU शुरू करने का इंतजार अब भी बना हुआ है। अब जिला अस्पतालों में गहन चिकित्सा सुविधाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद राज्य स्तर पर भी कवायद तेज होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में इस मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं। कांग्रेस जहां स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली के लिए भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहरा रही है, वहीं भाजपा विधायक जल्द सुविधा शुरू होने की बात कह रहे हैं।
महासमुंद का जिला अस्पताल अब 330 बिस्तरों वाला अस्पताल है। यहां हर दिन सैकड़ों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इसके बावजूद ICU जैसी महत्वपूर्ण सुविधा का अभाव स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। एक ओर 15 वेंटिलेटर उपलब्ध कराए जाने के बावजूद 6 मशीनों का खराब होना चिंता का विषय है, तो दूसरी ओर प्रशिक्षित स्टाफ और आवश्यक व्यवस्थाओं के अभाव में ICU का नियमित संचालन अब तक शुरू नहीं हो पाया है। अब देखना होगा कि शासन और अस्पताल प्रबंधन इस दिशा में कब तक ठोस कदम उठाते हैं और महासमुंद जिले के मरीजों को अपने ही जिला अस्पताल में गहन चिकित्सा की सुविधा मिल पाती है या नहीं।
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