Maheshwari Chauhan: जालोर जिले के छोटे से गांव सियाणा से शुरू हुआ निशानेबाजी का सफर अब जापान तक पहुंच गया है। एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला स्कीट टीम ने कांस्य पदक जीता। टीम में जालोर की माहेश्वरी चौहान भी शामिल रहीं। भारतीय तिकड़ी ने फाइनल में 331 अंक हासिल किए। पेरिस ओलम्पिक में मामूली अंतर से पदक से चूकने के बाद माहेश्वरी ने एशियन गेम्स में शानदार वापसी की।

तीन पीढ़ियों से मिली निशानेबाजी की विरासत

माहेश्वरी चौहान की सफलता के पीछे परिवार की तीन पीढ़ियों की निशानेबाजी से जुड़ी विरासत है। उनके दादा गणपत सिंह और पिता प्रदीप सिंह चौहान राष्ट्रीय स्तर तक निशानेबाजी कर चुके हैं। इसी खेल माहौल में माहेश्वरी ने भी निशानेबाजी की बारीकियां सीखीं।

बेटी की प्रतिभा को पहचानते हुए पिता प्रदीप सिंह ने सियाणा गांव से करीब छह किलोमीटर दूर आकोली रोड पर 18 बीघा जमीन में निजी शूटिंग रेंज तैयार करवाई। इसी रेंज में माहेश्वरी ने दादा गणपत सिंह, पिता प्रदीप सिंह और भाई दक्षेश्वर सिंह के साथ अभ्यास किया।

15 साल की उम्र में शुरू हुआ शूटिंग का सफर

पिता के अनुसार माहेश्वरी को करीब 15 साल की उम्र में शूटिंग का शौक लगा। वर्ष 2012 से उन्होंने स्टेट और नेशनल स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू किया। लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हुए उन्होंने सात नेशनल गोल्ड मेडल जीते।

वर्ष 2017 में पोपेटो में हुए जूनियर निशानेबाजी वर्ल्ड कप में माहेश्वरी ने पहला अंतरराष्ट्रीय पदक सिल्वर के रूप में जीता। इसके बाद उन्होंने ओलम्पिक और कॉमनवेल्थ गेम्स में भी देश का प्रतिनिधित्व किया।

पेरिस में पदक से चूकीं, जापान में बढ़ाया मान

माहेश्वरी ने दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से पढ़ाई के साथ निशानेबाजी जारी रखी। पेरिस ओलम्पिक में वह मामूली अंतर से पदक से चूक गईं। इसके बावजूद उन्होंने अभ्यास जारी रखा।

एशियन गेम्स 2026 में माहेश्वरी ने राइजा ढिल्लों और परिनाज धालीवाल के साथ भारतीय महिला स्कीट टीम का हिस्सा बनकर कांस्य पदक जीता। भारतीय टीम ने फाइनल में 331 अंक हासिल किए। महिला स्कीट में यह भारत का पहला एशियन गेम्स पदक है।

शादी के बाद भी जारी रखा निशानेबाजी का सफर

माहेश्वरी की शादी केलवा, उदयपुर में हुई है। उनके पति अजयराजसिंह राठौड़ भी नेशनल स्तर पर निशानेबाजी कर चुके हैं। परिवार से मिले सहयोग का असर उनके खेल सफर में लगातार दिखाई दिया।

माहेश्वरी ने कहा कि परिवार ने उनकी इच्छा के अनुरूप हमेशा उन्हें प्रेरित किया। शादी के बाद भी निशानेबाजी का सिलसिला जारी रहा। उनका कहना है कि शूटिंग के कारण उन्हें खुशी है कि वह सियाणा जैसे छोटे क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान का आधार बन रही हैं।

सियाणा में बांटी मिठाई, राजस्थान में खुशी

माहेश्वरी के एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीतने के बाद सियाणा गांव में ग्रामीणों ने मिठाई बांटकर खुशी जताई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भारतीय तिकड़ी को बधाई दी। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी माहेश्वरी को बधाई दी।

माहेश्वरी की यह उपलब्धि सियाणा से जापान तक पहुंचे उस सफर की कहानी है, जिसकी शुरुआत एक निजी शूटिंग रेंज और परिवार के सहयोग से हुई थी।

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