चंडीगढ़: हरियाणा में दशकों से अपनी ही जमीनों पर मालिकाना हक के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हजारों परिवारों के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार ने राहत का बड़ा पिटारा खोला है। राज्य सरकार ने जमीन के नियमों में एक ऐतिहासिक बदलाव करते हुए दशकों पुरानी जटिल प्रक्रिया को बेहद सरल और सुगम बना दिया है। अब वर्षों से काबिज पात्र परिवारों को अपनी जमीन का असली मालिक बनने के लिए जिला मुख्यालयों की दौड़ नहीं लगानी होगी, क्योंकि सरकार ने मालिकाना हक देने का अधिकार जिला उपायुक्त (DC) की जगह अब सीधे उपमंडल मजिस्ट्रेट (SDM) को सौंप दिया है।

दोहलीदार और बुटीमार परिवारों की बरसों पुरानी मुराद हुई पूरी
सरकार के इस फैसले से सालों से खेती-किसानी और रिहाइश कर रहे दोहलीदार, बुटीमार, भोंडेदार और मुकररीदार परिवारों को सीधे तौर पर बड़ी राहत मिलेगी। नए नियमों के मुताबिक, जो भी पात्र परिवार पिछले 20 वर्षों या उससे अधिक समय से ऐसी भूमि पर काबिज हैं, वे अब सीधे मालिकाना हक के हकदार होंगे। इस ऐतिहासिक कदम से न सिर्फ सालों से चले आ रहे भूमि विवाद खत्म होंगे, बल्कि इन परिवारों को समाज में एक नया आर्थिक संबल भी मिलेगा।
अब सीधे SDM दफ्तर में होगा त्वरित निपटारा
अक्सर देखा जाता था कि जिला उपायुक्त स्तर पर कार्यभार अधिक होने के कारण मालिकाना हक से जुड़े आवेदनों के निपटारे में सालों लग जाते थे। जनता की इसी परेशानी को समझते हुए सरकार ने अब विकेंद्रीकरण का रास्ता चुना है। अब पात्र परिवार सीधे अपने नजदीकी SDM कार्यालय में आवेदन कर सकेंगे, जिससे फाइलों का निपटारा न केवल पारदर्शी तरीके से होगा, बल्कि बेहद कम समय में आवेदकों को उनके अधिकार मिल जाएंगे।
मालिकाना हक के साथ मिला जमीन बेचने का भी अधिकार
इस फैसले की सबसे बड़ी और खास बात यह है कि जैसे ही इन परिवारों को भूमि का मालिकाना हक मिल जाएगा, उनके पास उस निजी भूमि को जरूरत पड़ने पर बेचने या ट्रांसफर करने का भी पूरा कानूनी अधिकार होगा। इससे पहले मालिकाना हक स्पष्ट न होने के कारण लोग अपनी ही जमीन का कोई वित्तीय लाभ नहीं उठा पाते थे। सरकार के इस कदम को ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों के विकास के लिए एक गेम-चेंजर माना जा रहा है।
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