रांची। झारखंड में JPSC और JSSC की नियुक्ति परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। एजेंसी ने जेपीएससी नियुक्ति मामले में ECIR दर्ज करते हुए TDPL के निदेशकों समेत कुल 8 लोगों को नामजद किया है। अब जांच में कथित अनियमितताओं के साथ-साथ परीक्षा से जुड़े पैसों के लेन-देन की भी पड़ताल की जाएगी।
TDPL की भूमिका पर ED की नजर
ED के मुताबिक, JPSC ने नियमों का पालन किए बिना नामांकन के आधार पर TDPL को परीक्षा से संबंधित काम सौंपा। एजेंसी का आरोप है कि कंपनी को काम देने से पहले उसकी पर्याप्त छानबीन भी नहीं की गई।
ED की जांच में यह भी सामने आया है कि TDPL को इससे पहले JSSC की कुछ परीक्षाओं का काम मिला था। कथित अनियमितताओं के बाद उसका वर्क ऑर्डर रद्द कर कंपनी को तीन साल के लिए प्रतिबंधित किए जाने की बात सामने आई है।
8 लोगों को बनाया गया नामजद
ECIR में TDPL के निदेशक सत्यपाल सिंह और रामवीर सिंह, JPSC की उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, JPSC कर्मचारी मनोज तिर्की और सोनू कुमार, TDPL से जुड़े मोहम्मद उस्मान, अवध और मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी को नामजद किया गया है।
आंसर-की शेयर करने का भी आरोप
ED के आरोपों के मुताबिक, JPSC के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक असीम किस्पोट्टा ने TDPL के कामकाज में कथित गड़बड़ियों की जानकारी आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष को दी थी। इसके बाद उनसे परीक्षा नियंत्रक का कार्य वापस लेकर श्वेता गुप्ता को सौंपे जाने का दावा किया गया है।
आरोप है कि श्वेता गुप्ता ने सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा की आंसर-की परिणाम जारी होने से पहले TDPL कर्मचारी मोहम्मद उस्मान को WhatsApp के जरिए भेजी थी। हालांकि, इस संबंध में CID और ED की ओर से आधिकारिक तौर पर विस्तृत पुष्टि सामने नहीं आई है।
JPSC के साथ JSSC की परीक्षाएं भी जांच के दायरे में
TDPL को पहले JSSC की परीक्षाओं का काम मिलने और बाद में कथित अनियमितताओं के चलते कार्रवाई होने के कारण अब JPSC के साथ JSSC की परीक्षाएं भी ED की जांच के दायरे में आ सकती हैं। एजेंसी मुख्य रूप से यह पता लगाएगी कि परीक्षा प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन कैसे हुआ और इसमें किसी तरह का आर्थिक लेन-देन हुआ या नहीं।फिलहाल ED की जांच जारी है। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर होगी।


