कैथल। सिटी थाना पुलिस ने सेक्टर-21 में ई-नीलामी के जरिए बाजार भाव से कम कीमत में प्लॉट दिलाने और उसमें 25 प्रतिशत हिस्सेदारी देने के नाम पर करीब 17 लाख रुपये की धोखाधड़ी के मामले में केस दर्ज किया है। पुलिस ने करनाल रेंज आईजी के सुरक्षा एजेंट सिपाही/पुलिसकर्मी मदनलाल, उनके बेटे अजय और सहयोगी कपिल शर्मा के खिलाफ जालसाजी और ठगी की धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। आरोपियों ने अधिकारियों से सेटिंग होने का दावा कर पीड़ित को झांसे में लिया था।

एचएसवीपी अधिकारियों से सेटिंग का दिया झांसा

कैथल निवासी शिकायतकर्ता अमित सिकरी के अनुसार आरोपी मदनलाल उनका पड़ोसी है और उनके पिता से उसके पुराने संबंध थे। इसी भरोसे का फायदा उठाकर मदनलाल ने खुद को कपिल शर्मा के साथ प्रॉपर्टी का कारोबार करने वाला बताया। उसने सेक्टर-21 में आठ प्लॉटों की ई-नीलामी में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) के अधिकारियों से सेटिंग होने और बाजार दर से कम में प्लॉट दिलवाने का दावा किया था।

1.79 करोड़ के प्लॉट में 25% हिस्सेदारी का सौदा

आरोपियों ने प्लॉट नंबर 1373 की ई-नीलामी में शिकायतकर्ता को 25 प्रतिशत हिस्सेदारी देने का भरोसा दिया। इसके लिए शुरुआत में 1.38 लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कराए गए, जबकि 5.52 लाख रुपये कपिल शर्मा के खाते से विभाग में जमा कराए गए। ई-नीलामी प्रक्रिया में यह प्लॉट 1 करोड़ 79 लाख 96 हजार रुपये में खरीदा गया।

किस्तों के नाम पर ऐंठे 17 लाख रुपये

प्लॉट आवंटन के बाद 10 प्रतिशत राशि जमा कराने के नाम पर 7.23 लाख रुपये ऑनलाइन और 1 लाख रुपये नकद लिए गए। इसके बाद 1 अप्रैल 2025 को 15 प्रतिशत अतिरिक्त राशि के नाम पर 6.75 लाख रुपये ऑनलाइन तथा 1.02 लाख रुपये नकद ऐंठे गए। इस तरह आरोपियों को कुल मिलाकर करीब 17 लाख रुपये का भुगतान किया गया।

फर्जी निकला 26.99 लाख रुपये का रसीद

जून 2026 में जब शिकायतकर्ताओं ने एचएसवीपी कार्यालय जाकर स्थिति की जांच की, तो पता चला कि 15 प्रतिशत राशि जमा ही नहीं की गई थी। इसके बाद मदनलाल ने 26.99 लाख रुपये की एक रसीद थमा दी। पंचकूला स्थित हुडा कार्यालय से सत्यापन कराने पर खुलासा हुआ कि यह रसीद विभाग द्वारा जारी ही नहीं की गई थी और पूरी तरह फर्जी थी।

पैसे मांगने पर मिली झूठे केस में फंसाने की धमकी

जालसाजी पकड़े जाने पर जब पीड़ितों ने अपने पैसे वापस मांगे, तो आरोपी 45 दिनों में रकम लौटाने की बात कहकर टालमटोल करते रहे। बाद में उन्होंने पैसे देने से साफ इनकार कर दिया। आरोप है कि मदनलाल ने पुलिस विभाग में अपनी नौकरी का हवाला देते हुए शिकायतकर्ता को झूठे केस में फंसाने की धमकी भी दी।

नौकरी के नाम पर पहले भी लगे हैं ठगी के आरोप

आरोपी मदनलाल पर वर्ष 2017 में रेलवे और सेना में नौकरी लगवाने के नाम पर दो भाइयों से 8.90 लाख रुपये ऐंठने का आरोप भी लग चुका है। उस मामले में 2.70 लाख रुपये लौटाए गए थे, जबकि 6.20 लाख रुपये नहीं दिए गए थे और केस दर्ज हुआ था। मौजूदा एफआईआर में भी मदनलाल पर पूर्व में लोगों से धोखाधड़ी कर पैसे हड़पने के आरोपों का जिक्र है।

पुलिस कर रही मामले की जांच

मामले की जानकारी देते हुए डीएसपी रमेश चंद्र ने बताया कि पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ नामजद केस दर्ज कर लिया है। पूरे मामले की गहनता से जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगामी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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