सुरेश पांडेय, सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के शिक्षा विभाग से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि 10 दिन लगातार अनुपस्थित रहने पर निलंबित की गई एक शिक्षिका को करीब 20 महीने बाद बहाल करते हुए निलंबन अवधि को कर्तव्य अवधि मानकर शेष वेतन भुगतान की स्वीकृति दे दी गई। अब इस पूरे मामले में नियमों के पालन और सरकारी धन के उपयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

अनुपस्थित रहने के आरोप में निलंबित किया था

दरअसल दस्तावेज के अनुसार, शासकीय प्राथमिक शाला बेलौही में पदस्थ शिक्षिका को 30 अगस्त 2024 को आदेश क्रमांक 3482/2024 के तहत 10 दिन लगातार बिना सूचना अनुपस्थित रहने के आरोप में निलंबित किया गया था। निलंबन आदेश में एमपी सिविल सर्विसेज (सीसीए) नियम 1966 का उल्लेख भी किया गया था।

कर्तव्य अवधि मानते हुए शेष वेतन भुगतान की स्वीकृति

इसके बाद 21 अप्रैल 2026 को तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी सूर्य भान सिंह द्वारा आदेश क्रमांक 311/परिवाद/2026 जारी किया गया। आदेश में निलंबन समाप्त करते हुए शिक्षिका की पदस्थापना बड़कुड़ में की गई और निलंबन अवधि को समस्त प्रयोजन के लिए कर्तव्य अवधि मानते हुए शेष वेतन भुगतान की स्वीकृति भी प्रदान की गई। वहीं 24 अप्रैल 2026 को शिक्षिका ने नई पदस्थापना पर जॉइनिंग दी।

क्या शिक्षिका को दोषमुक्त घोषित किया गया

अब इस पूरे मामले को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। यदि निलंबन अवधि को कर्तव्य अवधि माना गया, तो क्या विभागीय जांच पूरी हुई थी? क्या शिक्षिका को दोषमुक्त घोषित किया गया था? जांच प्रतिवेदन, अनुशासनात्मक कार्रवाई और वेतन भुगतान का आधार क्या है? इन सभी बिंदुओं पर अब जवाब मांगे जा रहे हैं।

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