कुमार इंदर, जबलपुर। मध्य प्रदेश के लगभग 23 हजार ग्राम रोजगार सहायकों (GRS) को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से एक बड़ी और राहत भरी सौगात मिली है। हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी रोजगार सहायक का अन्यत्र स्थानांतरण (ट्रांसफर) किया जाता है, तो उन्हें ट्रांसफर अलाउंस (TA), डेली अलाउंस (DA) और हाउस रेंट अलाउंस (HRA) का लाभ दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को इस संबंध में एक स्पष्ट पॉलिसी बनाने के निर्देश दिए हैं।

कम वेतन पाने वालों को दूर ट्रांसफर से होती है आर्थिक परेशानी

मामला सिंगरौली समेत 5 ग्राम रोजगार सहायकों द्वारा वर्ष 2025 में दायर की गई याचिका से जुड़ा है। इस मामले में 18 अक्टूबर को सुनवाई पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे हाल ही में सुनाया गया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बेहद संवेदनशील टिप्पणी करते हुए कहा कि लगभग 18 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाले इन कर्मचारियों का यदि दूर-दराज के इलाकों में ट्रांसफर किया जाता है, तो उन्हें भारी आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि चूंकि स्थानांतरण प्रशासनिक और सरकार की सुविधा के लिए किया जाता है, इसलिए कर्मचारियों को इसका आर्थिक मुआवजा या भत्ते (TA, DA और HRA) मिलने चाहिए।

तबादले की मांग खारिज, लेकिन भत्तों पर मुहर

हालांकि, हाईकोर्ट ने रोजगार सहायकों की ओर से उनके तबादलों पर पूरी तरह रोक लगाने या ट्रांसफर नहीं किए जाने की मांग को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार आवश्यकतानुसार प्रशासनिक जरूरत के आधार पर कर्मचारियों के ट्रांसफर कर सकती है, लेकिन ऐसा करते समय उन्हें वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना जरूरी है।

कमिश्नर को 6 महीने के भीतर पॉलिसी बनाने के निर्देश

माननीय न्यायालय ने राज्य शासन और संबंधित कमिश्नर को आदेशित किया है कि वे 6 महीने के भीतर इस संबंध में एक सुव्यवस्थित पॉलिसी तैयार कर कोर्ट के समक्ष पेश करें। इस ऐतिहासिक फैसले से प्रदेशभर के हजारों रोजगार सहायकों में खुशी की लहर दौड़ गई है, जिन्हें अब तबादले की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी।

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