दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह (Pankaj Kumar Singh) ने कथित सर्जिकल कंज्यूमेबल्स घोटाले (Alleged surgical consumables scam) से जुड़े आरोपों को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग से विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की है। मंत्री कार्यालय की ओर से जारी आदेश में संबंधित अधिकारियों को मामले की पूरी जानकारी सहित रिपोर्ट तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्री कार्यालय के अनुसार, शिकायत के आधार पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग से इस मामले में डिटेल्ड रिपोर्ट मांगी गई है। यह मामला एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) की FIR संख्या 01/2024 से जुड़ा हुआ है, जिसमें 13 सप्लायर कंपनियों पर कथित रूप से घटिया गुणवत्ता वाले सर्जिकल कंज्यूमेबल्स की आपूर्ति करने के आरोप लगाए गए हैं।

कंपनियों पर क्या कार्रवाई हुई? स्वास्थ्य मंत्री ने मांगा पूरा ब्योरा

कथित सर्जिकल कंज्यूमेबल्स घोटाले के मामले में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग से कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जवाब तलब किया है। मंत्री ने विभाग से पूछा है कि एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) की एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपित कंपनियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है।

मंत्री कार्यालय की ओर से जारी निर्देश में यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि जिन 13 सप्लायर कंपनियों पर घटिया गुणवत्ता वाले सर्जिकल कंज्यूमेबल्स की आपूर्ति के आरोप हैं, उनके खिलाफ ब्लैकलिस्टिंग या डिबारमेंट की प्रक्रिया शुरू की गई है या नहीं। यदि ऐसी कोई कार्रवाई की गई है तो उसका पूरा विवरण उपलब्ध कराने को कहा गया है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग से यह जानकारी भी मांगी गई है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद संबंधित कंपनियों को कोई नया टेंडर, कॉन्ट्रैक्ट, वर्क ऑर्डर या भुगतान जारी किया गया है या नहीं। यदि ऐसा हुआ है तो उससे संबंधित सभी विवरण और दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

क्या है पूरा मामला?

कथित सर्जिकल कंज्यूमेबल्स घोटाले का मामला दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में सप्लाई किए गए सर्जिकल सामान की गुणवत्ता को लेकर उठे गंभीर आरोपों से जुड़ा है। एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) की एफआईआर के अनुसार, अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली पट्टियों और गॉज (Gauze) जैसे सर्जिकल उत्पादों के निर्माण में निर्धारित भारतीय मानक (IS) के अनुरूप सूती धागों के बजाय कथित तौर पर सस्ते चीनी प्लास्टिक तारों का उपयोग किया गया। आरोप है कि इन उत्पादों की आपूर्ति 13 सप्लायर कंपनियों द्वारा की गई और गुणवत्ता मानकों की अनदेखी कर अस्पतालों तक पहुंचाया गया। शिकायत के अनुसार, इस तरह के घटिया सर्जिकल सामान का इस्तेमाल मरीजों के उपचार में किया जा रहा था, जिससे स्वास्थ्य संबंधी जोखिम पैदा होने की आशंका जताई गई।

मामले की जांच के दौरान दिल्ली सरकार के प्रमुख सरकारी अस्पतालों लोक नायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल (LNJP), गुरु तेग बहादुर अस्पताल (GTB) और दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल (DDU) समेत अन्य संस्थानों में सप्लाई किए गए सर्जिकल कंज्यूमेबल्स के नमूनों की जांच कराई गई। आरोप है कि लैब परीक्षण में कई नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे और परीक्षण में फेल पाए गए। इन्हीं आरोपों के आधार पर एंटी करप्शन ब्रांच ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू की थी। अब स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने इस पूरे प्रकरण पर विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब करते हुए यह जानना चाहा है कि आरोपित कंपनियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई, उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया कहां तक पहुंची और एफआईआर के बाद उन्हें कोई नया टेंडर, कॉन्ट्रैक्ट या भुगतान तो नहीं दिया गया।

हेल्थ सेक्रेटरी से रिपोर्ट तलब

कथित सर्जिकल कंज्यूमेबल्स घोटाले के सामने आने के बाद दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज सिंह ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। मंत्री ने मामले में कथित लापरवाही और कार्रवाई में हुई देरी को गंभीरता से लेते हुए हेल्थ सेक्रेटरी से विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। मंत्री कार्यालय की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि यह स्पष्ट किया जाए कि मामला सामने आने और एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक क्या कदम उठाए गए। साथ ही यह भी बताया जाए कि आरोपित कंपनियों और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई की गई है। आरोप है कि 13 सप्लायर कंपनियां कथित मास्टरमाइंड संदीप गुप्ता और कुछ सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से इस पूरे सिंडिकेट का संचालन कर रही थीं।

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