JSSC में इंपैनल कराने के लिए 5 लाख का कमीशन, स्वास्थ्य विभाग की भर्तियों में 9 लाख मिलने का दावा; वेबेल एजेंसी पर भी गंभीर आरोप
रांची। झारखंड के बहुचर्चित JPSC मेधा घोटाला मामले की जांच में गिरफ्तार परीक्षा संचालन एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी ने CID पूछताछ में कई अहम खुलासे किए हैं। उसके बयान के मुताबिक JSSC में एजेंसी को इंपैनल कराने के लिए कमीशन का लेन-देन हुआ था।
अभय तिवारी ने CID को बताया कि स्वास्थ्य विभाग में अनुबंध आधारित भर्तियों के जरिए उसे कथित तौर पर 9 लाख रुपये कमीशन मिले थे। वहीं, JSSC में TDPL को इंपैनल कराने के एवज में उसे 5 लाख रुपये कमीशन मिलने का दावा किया गया है।
JSSC में इंपैनल कराने के लिए 10 लाख के कमीशन का दावा
पूछताछ में सामने आई जानकारी के अनुसार, अभय तिवारी का JSSC के सहायक सेक्शन अफसर प्रेम कुमार से संपर्क था। उसके दोस्त सैंटी उर्फ लालू प्रसाद के माध्यम से TDPL को JSSC में इंपैनल कराने की कोशिश हुई।
अभय के अनुसार, TDPL के इंपैनलमेंट के बाद उसे 5 लाख रुपये और प्रेम कुमार को 5 लाख रुपये कमीशन मिला। उसने CID के सामने यह भी स्वीकार किया कि प्रेम कुमार के हिस्से के 5 लाख रुपये उसने खुद JSSC भवन के सामने पहुंचाए थे।
टेंडर प्रक्रिया में साठगांठ का आरोप
अभय तिवारी ने यह भी दावा किया कि JSSC की परीक्षाओं में बायोमेट्रिक सेवा का काम दिलाने के लिए टेंडर प्रक्रिया में साठगांठ की गई थी।उसने बताया कि वर्ष 2023 में उसने JSR एजेंसी में प्रोजेक्ट को-ऑर्डिनेटर के तौर पर काम शुरू किया था। इसी दौरान स्वास्थ्य विभाग में अनुबंध आधारित भर्तियों में उसे कथित तौर पर 9 लाख रुपये कमीशन मिला।
TDPL के हटने के बाद वेबेल को मिला काम
पूछताछ में यह बात भी सामने आई कि TDPL को अपेक्षित दर नहीं मिलने के कारण उसने काम से पीछे हटने की बात कही। इसके बाद JSSC ने एजेंसी को डी-इंपैनल कर दिया और परीक्षा संचालन का काम वेबेल एजेंसी को दिया गया।
इसके बाद अभय तिवारी का संपर्क वेबेल एजेंसी से होने की बात सामने आई है। इसी एजेंसी पर JSSC परीक्षा के दौरान बोकारो में छात्रों को कथित तौर पर प्रश्न और उत्तर रटवाने के आरोप लगे हैं। इन आरोपों की जांच जारी है।
TDPL के निदेशक ने भी CID को दी जानकारी
मामले में गिरफ्तार TDPL के निदेशक रामवीर सिंह ने भी CID पूछताछ में JSSC-CGL परीक्षा से जुड़ी जानकारी दी है। उनके मुताबिक TDPL को मुख्य परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी नहीं मिली थी, बल्कि केवल सहायक सेवाओं का काम सौंपा गया था।
रामवीर सिंह के अनुसार, कम दर मिलने के कारण कंपनी को वित्तीय नुकसान हो रहा था। इसी वजह से TDPL के पीछे हटने के बाद JSSC ने उसे डी-इंपैनल कर दिया।
परीक्षा में सहायक सेवा की क्या होती है भूमिका?
JSSC की परीक्षा व्यवस्था में सहायक सेवा बेहद महत्वपूर्ण होती है। संबंधित एजेंसी को परीक्षा केंद्रों पर—
अभ्यर्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन
पहचान की जांच
CCTV निगरानी
प्रश्नपत्रों की सुरक्षित आवाजाही
परीक्षा के बाद OMR शीट और उत्तर पुस्तिकाओं का संकलन
ऑनलाइन परीक्षा में सर्वर, कंप्यूटर नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्टिविटी की तकनीकी व्यवस्था
जैसी जिम्मेदारियां निभानी होती हैं।
अब CID की जांच में इन आरोपों और बयानों से जुड़े दस्तावेजों, लेन-देन और संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।


