रांची। फेसबुक पोस्ट और कमेंट के जरिए कथित तौर पर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के मामले में एक साल से अधिक समय से जेल में बंद सहदेव उरांव उर्फ सहदेव ओरांव को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी नियमित जमानत मंजूर करते हुए झारखंड हाईकोर्ट का 17 अप्रैल 2026 का आदेश रद्द कर दिया है। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की शर्तों के अधीन उन्हें जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया।
साइबर क्राइम केस में दर्ज था मामला
सहदेव उरांव के खिलाफ साइबर क्राइम केस नंबर 40/2025 दर्ज है, जो FIR नंबर 239/2025 से संबंधित है। मामले में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 75, 78, 79 और 356(2) के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66(C) और 67 के तहत आरोप लगाए गए हैं।
फेसबुक पोस्ट और कमेंट से प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का आरोप
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक सहदेव उरांव सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करते थे। उन पर फेसबुक पर पोस्ट और कमेंट के जरिए किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया था।
मामले में उनकी ओर से नियमित जमानत की मांग की गई थी। राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए अपराध की प्रकृति का हवाला दिया और हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप नहीं करने की दलील दी।
एक साल से ज्यादा जेल में रहने का कोर्ट ने लिया संज्ञान
सुनवाई के दौरान सहदेव उरांव की ओर से दलील दी गई कि कथित अपराध में अधिकतम तीन वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। सुप्रीम कोर्ट ने रिकॉर्ड पर गौर किया तो पाया कि वह एक साल से अधिक समय जेल में रह चुके हैं और मामले में ट्रायल भी शुरू हो चुका है।कोर्ट ने इन परिस्थितियों को देखते हुए कहा कि अब उनकी लगातार हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है।
17 अप्रैल का हाईकोर्ट आदेश रद्द
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने 29 सितंबर 2026 को मामले की सुनवाई की। पीठ ने झारखंड हाईकोर्ट के 17 अप्रैल 2026 के आदेश को रद्द करते हुए सहदेव उरांव को नियमित जमानत दे दी।जमानत की शर्तें संबंधित ट्रायल कोर्ट द्वारा तय की जाएंगी।
SLP के जरिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था मामला
मामला SLP (क्रिमिनल) नंबर 15058/2026 के जरिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने अपील स्वीकार कर ली और हाईकोर्ट का पूर्व आदेश निरस्त कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने मामले से जुड़े लंबित आवेदनों का भी निस्तारण कर दिया।


