भुवनेश्वर: ओडिशा विधानसभा का मानसून सत्र पहले ही दिन विपक्ष के जोरदार हंगामे और नारेबाजी की भेंट चढ़ गया। मुख्य विपक्षी दल बीजू जनता दल और कांग्रेस के विधायकों ने खान एवं खनिज विकास और विनियमन संशोधन विधेयक और स्कूली पाठ्यपुस्तकों में कथित गंभीर त्रुटियों के मुद्दे पर दिनभर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। बार-बार के व्यवधान और गतिरोध को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी ने आखिरकार सदन की कार्यवाही को बुधवार (अगले दिन) तक के लिए स्थगित कर दिया।
मंगलवार को सत्र की शुरुआत में ही विपक्षी नेताओं के आक्रामक तेवर देखने को मिले। पूरे दिन में तीन बार सदन को स्थगित करना पड़ा। प्रश्नकाल शुरू होते ही बीजेडी और कांग्रेस विधायक हाथों में प्लैकार्ड (तख्तियां) लेकर अध्यक्ष के आसन के करीब पहुंच गए। सरकार विरोधी नारेबाजी के कारण कार्यवाही दोपहर 1:10 बजे तक स्थगित कर दी गई।

दोपहर 1:10 बजे जब दोबारा कार्यवाही शुरू हुई, तब भी विपक्षी विधायकों का विरोध जारी रहा, जिसके चलते अध्यक्ष ने सदन को शाम 4:00 बजे तक के लिए मुल्तवी कर दिया। शाम 4 बजे जब सदन दोबारा समवेत हुआ, तो विपक्षी विधायक फिर से वेल में उतर आए और जोर-जोर से नारेबाजी करने लगे। शांति बनाए रखने की अध्यक्ष की अपीलों का कोई असर न होने पर उन्होंने कार्यवाही को बुधवार तक के लिए स्थगित करने की घोषणा की।
हंगामे से पहले सत्र की शुरुआत परंपरागत रूप से दिवंगत विधायकों, विशिष्ट लोक सेवकों और जन हस्तियों को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शोक प्रस्ताव पेश किया और अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। सदन ने नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ में जान गंवाने वाले नागरिकों को भी याद किया और दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की।
विपक्ष का मुख्य विरोध केंद्र के MMDR कानून और राज्य की स्कूली किताबों में छपी त्रुटियों को लेकर था। विधायकों ने आरोप लगाया कि शिक्षा प्रणाली और राज्य के खनिज संसाधनों के संरक्षण पर सरकार गंभीर नहीं है। लगातार नारेबाजी और व्यवधान के कारण पहले दिन का कोई भी विधायी या बजटीय कार्य निपटाया नहीं जा सका।
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