राकेश चतुर्वेदी, भोपाल/ बालाघाट। मध्यप्रदेश के बालाघाट से सरकारी सिस्टम को सवालों के घेरे में खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक शख्स कथित तौर पर फर्जी एमबीबीएस डिग्री के सहारे 17 साल तक सरकारी नौकरी करता रहा। इतना ही नहीं, चार बार प्रमोशन पाकर बिरसा ब्लॉक में बीएमओ तक बन गया। लेकिन जब डिग्री की जांच हुई, तो पूरा मामला खुलकर सामने आ गया।
हैरानी की बात यह है कि पुलिस जांच में उसकी पहचान भी फर्जी निकली। जिस शख्स को विभाग सुनील सिंह के नाम से जानता था, उसका असली नाम शिवकुमार पांडे है। अब पुलिस आरोपी की तलाश कर रही है और उस पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर 17 साल तक यह फर्जीवाड़ा कैसे चलता रहा और दस्तावेजों के सत्यापन में चूक कहां हुई?
मामला बालाघाट जिले के बिरसा ब्लॉक का है। यहां सुनील सिंह के नाम से नौकरी करने वाले शख्स ने साल 2009 में कथित तौर पर फर्जी डिग्री के आधार पर स्वास्थ्य विभाग में नौकरी हासिल की। इसके बाद साल 2012 में वह संविदा डॉक्टर बना और साल 2023 में बीएमओ के पद तक पहुंच गया। इस दौरान उसे चार बार प्रमोशन भी मिला। यानी जिस व्यक्ति की डिग्री अब जांच में फर्जी पाई गई है, वह वर्षों तक स्वास्थ्य विभाग में अहम जिम्मेदारी संभालता रहा। राज्य स्तरीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर 10 अक्टूबर को बिरसा थाने में उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
अब सवाल उठ रहे हैं कि नौकरी देते समय डिग्री का सत्यापन कैसे हुआ? मेडिकल रजिस्ट्रेशन की जांच में यह गड़बड़ी क्यों नहीं पकड़ी गई? और अगर विभागीय जांच हुई थी, तो आरोपी हर बार जांच से कैसे बचता रहा? पुलिस जांच में मामला और भी चौंकाने वाला निकला। पुलिस आरोपी की तलाश में उसके बताए गए गृह जिले रीवा तक पहुंची, जहां उसकी पहचान को लेकर खुलासा हुआ।
पुलिस के मुताबिक, सुनील सिंह के नाम से नौकरी करने वाले शख्स का असली नाम शिवकुमार पांडे है। उसके दस्तावेजों में गृह जिला कभी मुरैना, कभी रीवा तो कभी बालाघाट दर्ज था। इतना ही नहीं, उसके पास स्थायी मेडिकल रजिस्ट्रेशन का रिकॉर्ड भी नहीं मिला, जबकि प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन के दस्तावेज जमा किए गए थे। पुलिस ने आरोपी की तलाश में जगह-जगह पोस्टर चस्पा किए हैं और 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है।
इस मामले में देवास में पदस्थ दूसरे डॉक्टर सुनील कुमार का नाम भी सामने आया। दोनों के दस्तावेजों में नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि और रीवा के एपीएसयू से एमबीबीएस की डिग्री का विवरण एक जैसा बताया गया। हालांकि, देवास में पदस्थ डॉक्टर सुनील कुमार तीन बार पेश होकर अपनी डिग्री असली साबित कर चुके हैं। अब जांच के घेरे में सिर्फ आरोपी की गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि यह भी है कि दस्तावेजों में इतनी समानता कैसे आई और स्वास्थ्य विभाग में इतने वर्षों तक सत्यापन की प्रक्रिया में चूक कैसे होती रही।
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